अजमेर ब्लास्ट मामले का फैसला 8 मार्च तक टला, 149 में से 26 महत्वपूर्ण गवाह हुए पक्षद्रोही

Published Date 2017/02/25 13:26, Written by- Ramswaroop Lamror

जयपुर | करीब नौ साल पहले 11 अक्टूबर 2007 को अजमेर स्थित सुफी संत मोईनुद्दीन चिस्ती दरगाह में हुए बम बलास्ट वाले मामले का फैसला 8 मार्च तक के लिए टाल दिया गया है। एनआईए की विशेष कोर्ट से शनिवार को इस बहुचर्चित मामले में फैसला आने वाला था। दरगाह ब्लास्ट मामले में अब तक गिरफ्तार हुए 9 आरोपियों को कोर्ट में पेश भी किया गया लेकिन न्यायालय ने आठ मार्च को फैसला सुनाने की बात कही। न्यायालय की ओर से कहा गया कि ये बहुत गम्भीर और काफी बड़ा प्रकरण है ऐसे में सभी तथ्यों के विश्लेषण में थोड़ा और वक्त लगेगा।

 

अभियोजन पक्ष की तरफ से करीब 149 गवाह पेश किए गए, जिसमें से करीब 26 महत्वपूर्ण गवाह पक्षद्रोही हो गए थे। इस प्रकरण की जांच पहले राजस्थान एटीएस ने शुरू की थी। एटीएस ने पूरे मामले में तीन आरोपी देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा और चन्द्रशेखर लेवे को साल 2010 में गिरफ्तार कर लिया। 20 अक्टूबर 2010 को मामले से जुड़ी पहली चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर दी गई, लेकिन इसके बाद अप्रैल 2011 में गृह विभाग द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी करके मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई। एनआईए ने मामले में जांच आगे बढ़ाई और स्वामी असीमानन्द, हर्षद सोलंकी, मुकेश बसानी, भरतमोहनलाल रतेश्वर, भावेश अरविन्द भाई पटले और मफत उर्फ मेहूल को गिरफ्तार किया|

 

मामले में तीन चार्जशीट और पेश की गई। पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 442 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। बचाव पक्ष की तरफ से 38 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए 2 गवाह पेश किए गए| अभियोजन पक्ष भी मानता है कि जो गवाह पक्षद्रोही साबित हुए हैं वे काफी महत्वपूर्ण हैं वहीं बचाव पक्ष ने मामले में कई आरोपियों को झूठा फंसाने की बात भी कही है। स्वामी असीमानन्द की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट जे एस राणा ने बताया कि कोर्ट ने साक्ष्यों पर और विश्लेषण करने की बात कह कर फैसला 8 मार्च तक टाला है।

 

इस प्रकरण में दस आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। चार आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं। फरार आरोपियों में सुरेश नायर, अमित ऊर्फ हकला, संदीप डांगे और रामचंद्र कंलसागरा शामिल है। कोर्ट में पेशी के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। कोर्ट परिसर में कुछ आरोपियों के परिजन भी उनसे मिलने आए थे। गौरतबल है कि 11 अक्टूबर 2007 को अजमेर स्थित सुफी संत मोईनुद्दीन चिस्ती की दरगाह में बम बलास्ट हुआ था जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और 15 लोग घायल हुए थे। इस प्रकरण के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई है|

 

 


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