जेएलएन अस्पताल में हादसा, मरीज के परिजन के सिर पर गिरा छत से मलबा

Published Date 2017/01/06 18:18, Written by- Priyank Sharma

अजमेर। लोग अस्पतालों में अपने मर्ज का इलाज करवाने आते हैं, लेकिन जब अस्पताल खुद बीमार हो तो मरीज का मर्ज घटने के बजाय और बढ़ जाता है। अजमेर संभाग के सबसे बड़े जेएलएन अस्पताल की बात करें तो संभाग के लोगों के लिए यह एक बड़ी उम्मीद की किरण से कम नहीं है। अस्पताल की इमारत दिखने में भले ही मजबूत लगे, लेकिन यह आपकी आखों का धोखा भी हो सकता है। जी हां, यहा इलाज करवाना जान हथेली पर लेकर चलने के बराबर है। मर्ज मिटे न मिटे आपके दिनमान जरूर यहां बिगड़ सकते हैं।


अजमेर में जेएलएन अस्पताल के मेडिकल वार्ड 2 में मरीज के बेड के पास तीमारदारी में लगे परिजन के लिए शुक्रवार की सुबह आफत बन कर आई। उसे क्या मालूम था कि अस्पताल में स्टूल पर बैठकर साले की देखभाल करना उसे महंगा पड़ जाएगा। बल्कि यूं कहें कि उसी भी अस्पताल में उसे भर्ती होकर इलाज के लिए मोहताज होना पड़ेगा।


हुआ दरअसल यूं कि राजनलाल वाल्मीकि अपने बीमार साले आकाश की देखभाल के लिए रात को अस्पताल में ही रुका था। रातभर आकाश के बेड के पास बैठकर राजनलाल सुबह का इन्तजार कर रहा था। इस दौरान आरसीसी की छत से मलबा अचानक भरभरा कर उसे सिर पर गिर पड़ा। इस हादसे से वार्ड में हड़कंप मच गया और बड़ी दुर्घटना होने के डर से मरीज और परिजन वार्ड के बाहर आ गए, लेकिन राजनलाल की किस्मत ख़राब थी। मलबा उसके सिर पर गिरा और वह बुरी तरह से जख्मी हो गया।


हादसे में घायल होने के बाद उसके सिर में 18 टांकें आये हैं। वहीं उसके दिमाग में चोट की वजह से दो जगह खून के थक्के भी जम गए हैं। इतना होने के बाद भी उसकी मुसीबत कम नहीं हुई। राजनलाल को न्यूरो सर्जन वार्ड में भर्ती तो करवा दिया गया, मगर अस्पताल में एक ही न्यूरोसर्जन होने और वह भी अवकाश पर होने की वजह से राजन को संभाग से सबसे बड़े जेएलएन अस्पताल में भी इलाज के लिए मोहताज होना पड़ा। राजनलाल के पुत्र सागर का आरोप है कि हादसा होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उसकी इलाज में मदद करने की बजाय रैफरल टिकट नहीं बनाकर उसके पिता का डिस्चार्ज टिकट बना दिया।


इसे अस्पताल की घोर लापरवाही कहें या सार्वजनिक निर्माण विभाग की, लेकिन सवाल एक जिंदगी का है, जो मौत से संघर्ष कर रही है। इस बारे में अस्पताल अधीक्षक की गैर मौजूदगी में डिप्टी अधीक्षक डॉ विक्रांत शर्मा ने हादसे की जिम्मेदारी का ठीकरा सार्वजनिक निर्माण विभाग के सिर फोड़ने के साथ ही अस्पताल प्रशासन की लाचारी भी जाहिर कर दी। न्यूरोसर्जन के अवकाश पर जाने के बाद राजन को इलाज मिल पाना अस्पताल में संभव नहीं है। लिहाजा राजनलाल को जयपुर रैफर करने के लिए अस्पताल प्रशासन राजी हो गया।

 

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