Drug Control Department becomes a Formality in ajmer

राम भरोसे ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट, बेलगाम होती दवा बिक्री

Published Date-27-Feb-2017 08:02:13 PM,Updated Date-27-Feb-2017, Written by- Priyank Sharma

अजमेर। अजमेर में जिला औषधी नियंत्रण विभाग जिम्मेदार अधिकारियों के अभाव में औपचारिक बन चुका है। वहीं अजमेर दवा का नियंत्रण बेलगाम बन चुका है। आमजन को दवा की समझ नहीं होती उन्हें तो मर्ज दूर करने के लिए दवा चाहिए। दवा की दुकानों पर बिक रही दवा नकली और प्रतिबंधित है या असली है, यह नियंत्रण करने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी अजमेर में नजर नहीं आता है।


अजमेर जिले में साढ़े बारह सौ लाइसेंसधारी दवा विक्रेता है, जिनमें से कई थोक विक्रेता हैं। इन पर नियंत्रण रखने के लिए जिला स्तर पर औषधी नियंत्रण विभाग भी है, लेकिन इन विक्रेताओं पर विभाग की पकड़ कितनी मजबूत है, विभाग के कार्यालय में पड़ी एडीसी की खाली कुर्सी से इसका अन्दाजा लगाया जा सकता है। 20 फ़रवरी तक इस कुर्सी पर एडीसी मौजूद थे, जिन्हें जयपुर बुला लिया गया। इसके बाद से ये कुर्सी आज तक भी पद भरने की प्रतीक्षा में है।


डीसीओ के विभाग में 5 पद है, लेकिन 3 पद रिक्त है। यूडीसी प्रथम का एक और 4 द्वितीय ग्रेड के पद रिक्त हैं। अब आप खुद ही समझ लें कि दवा नियंत्रण को बाद में पहले विभाग को नियंत्रण में करना कितना जरुरी है। जिले में दवा की दुकानों पर बिकने वाली दवा असली है या नकली यह बताने वाले हो तो पता चले। चिकित्सक पर्ची लिखते हैं और मरीज दुकानों से दवा ले रहे हैं। बस यही सिलसिला बरक़रार है।


जाहिर है जब कोतवाल का डर न हो तो चोरों की तो मौज होती ही है। पिछले वर्षों में विभाग ने 25 लाइसेंस निरस्त किये। 30 मामले ऐसे हैं, जो अवमानक के हैं और वे अदालत में विचाराधीन हैं। इसके अलावा नकली दवा की 2011 में खेप पकड़ी गई थी, जिसमें दो आरोपियों को सजा भी हो चुकी है। ये वो मामले हैं जो कुर्सी पर मौजूद रहे अधिकारियो ने किये, लेकिन वर्तमान में विभाग और दवा की बिक्री सब रामभरोसे नजर आ रही है।

 

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