electricity privatization issue becomes neck albatross for congress

कांग्रेसियों के लिए गले की फांस बना बिजली निजीकरण का मुद्दा

Published Date-27-Feb-2017 07:41:41 PM,Updated Date-27-Feb-2017, Written by- Priyank Sharma

अजमेर। अजमेर में बिजली निजीकरण को लेकर कांग्रेस का आंदोलन जारी है। कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन अजमेर बन्द और यहां तक कि डिस्कॉम एमडी का घेराव तक किया। सोमवार को भी कांग्रेसी डिस्कॉम के बाहर निजीकरण की होली जलाने पहुंच गए। जिस जोश के साथ कांग्रेसियों ने बिजली निजीकरण की शुरुआत की थी, वही जोश अब ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है।


निजीकरण के होली दहन और विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों की कम उपस्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। अजमेर में बिजली निजीकरण का मुद्दे को कांग्रेस ने पुरजोर हवा दी। जनता को निजीकरण के नुकसान बताए और समर्थन भी मांगा। नतीजन कांग्रेस के अजमेर बन्द को जनता ने समर्थन दिया। बन्द की सफलता के बाद कांग्रेसियों में उत्साह और ऊर्जा दोनों का संचार हुआ, मगर यह उत्साह कैसे गायब हुआ, इसको कांग्रेसी आम कार्यकर्ता भी नहीं समझ पा रहे हैं।


दरअसल, अजमेर में बिजली निजीकरण को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ठ है। यही वजह है कि तमाम विरोध के बावजूद डिस्कॉम अधिकारियों ने टेण्डर के लिए निवेदाएं लेना भी शुरू कर दिया। इधर, कांग्रेस के शहर अध्यक्ष विजय जैन कांग्रेस के आंदोलन से हतोत्साहित नजर आये। शायद वे भूल गए कि अजमेर में कांग्रेस की गुटबाजी से पीसीसी पार नहीं पा सकी। कांग्रेसी की गुटबाजी भी ऐसी की पैरों से जमीन कब सरक जाए, कहा नहीं जा सकता।


जैन को कुछ वरिष्ठ नेताओं ने आंदोलन को विराम देने और कोर्ट में जंग लड़ने का सुझाव भी दिया, मगर जैन अपने उत्साह में सब भूल गए। निजीकरण की होली डिस्कॉम के बाहर जलाने का कार्यक्रम तय कर लिया। विरोध प्रदर्शन में नेताओं की मौजूदगी तो दिखी, मगर कार्यकर्ता मुट्ठी भर ही नजर आए। लिहाजा, जोरदार भीड़ जुटने की जैन की उम्मीद पर पानी फिर गया। बावजूद इसके कांग्रेसी अब भी निजीकरण के आंदोलन को जारी रखने का दम भर रहे हैं।


बहरहाल, ऐसे में कांग्रेसी नेताओं के बयान से जाहिर है कि बिजली निजीकरण का मुद्दा गले में हड्डी की तरह फंस चुका है। अलबत्ता अजमेर की बिजली निजी हाथों में जाना तय माना जा रहा है। कांग्रेसी भी इस बात को मान चुके हैं, मगर ख़ास बात यह भी है कि सरकार पर दबाव बनाने में कांग्रेसी नकाम भी रहे। इतने दिनों तक कांग्रेसियों के आंदोलन को अजमेर ने तो देखा मगर इसकी गूंज विधानसभा तो छोडो पीसीसी तक नहीं पहुच पाई है।

 

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