अजमेर केंद्रीय कारागार में चल रहा कैदियों से वसूली का घिनौना खेल

Published Date 2017/04/11 19:10, Written by- FirstIndia Correspondent

अजमेर केंद्रीय कारागार में सुविधा शुल्क नही देने पर कैदियों के साथ जेल के भीतर अमानवीय तरीके से मारपीट करने का मामला सामने आया है। जिन कैदियों के साथ मारपीट की गई उन कैदियों ने कलेक्टर को शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच करवाने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और पीड़ित कैदियों का मेडिकल मुआयना करवाने की मांग की है। जेलों में सुविधा शुल्क का खेल नया नही है। मगर अफ़सोस है कि कुख्यात आनंदपाल के फरारी प्रकरण के बाद जिस तरह के खुलासे जेल में उसको दी जा रही सुविधाओ के हुए उससे भी जेल विभाग ने सबक नही लिया।

 

इस बार अजमेर केंद्रीय कारागार में शुल्क नही देने वाले कैदियों के साथ ही मारपीट हुई है। जबकि जो कैदी सुविधा शुल्क दे रहे है। उन कैदियों की जेल में मौज हो रही है। परिजन का आरोप है कि भूरा नाम का नंबरदार कैदियों से जेल अधीक्षक की शह पर वसूली के लिए दबाव बनाता है। जेल से बाहर भूरा की पत्नी रिहाना कैदियों के परिजन से पैसा वसूलती है। पैसा रिहाना के बैंक अकॉउंट में आता है और उसके बाद बैंक से वही पैसा निकालकर जेल अधिकारियो में बंटता है। एक कैदी के परिजन ने हमे रिहाना के साथ हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग भी दी है।

 

 
रिकॉर्डिंग से साफ़ जाहिर होता है कि जेल में सुविधा शुल्क के नाम पर बहुत ही घिनोना खेल हो रहा है। परिजन का यह भी आरोप है कि 10 से 50 हजार रूपए तक सुविधा शुल्क जेल में कैदी से मांगा जाता है। 6 अप्रैल की रात ढाई बजे बैरिक नंबर 12 में मोबाइल के लिए सर्च की गई थी। जिसमे 60 से अधिक मोबाइल कैदियों के पास से बरामद हुए। जिन कैदियों के पास मोबाइल नही मिले उन्हें सुविधा शुल्क के लिए कहा गया। सुविधा शुल्क नही देने पर कैदियों को धमकाया गया। कुछ कैदियों ने विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई।

 

जेल में मोबाइल मिलने की सूचना और कैदियों के साथ मारपीट का मामला जेल में ही दफन हो गया। बहरहाल इस राज से पर्दा जब उठा तब परिजन जेल में कैद अपने पति बेटे से मिलने गए। कैदियों पर जुल्म को सुनकर उनकी रूह काँप गई। एक से दो, दो से तीन कैदियों के परिजन अब तक सामने आ चुके है। मानवाधिकार सबके लिए है फिर चाहे वो जेल बन्द खूंखार कैदी ही क्यों ना हो।

 

परिजनों की बातो पर विश्वास किया जाए तो केंद्रीय कारागार अमीर कैदियों के लिए ऐशगाह और गरीब कैदियों के लिए किसी भयावह स्थान से कम नही है। जिस तरह सुविधा शुल्क और दलाली का काम जेल में हो रहा है उससे तो यही लगता है कि जेल में सुधरने का वातावरण नही बल्कि अपराधी तैयार करने का माहौल बन गया है। 

 

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