the roots of drug trade has been frozen in Ajmer

अजमेर में जम चुकी है नशे के कारोबार की जड़ें, अब स्मार्ट पुलिसिंग की दरकार

Published Date-05-Jan-2017 08:06:42 PM,Updated Date-05-Jan-2017, Written by- Priyank Sharma

अजमेर। बरसों से अजमेर को नशे का ट्रांजिट पॉइंट माना जाता रहा है। कमोबेश आज भी हालात नहीं बदले हैं। नशा सघन क्षेत्र हो या रेल मार्ग ट्रांजिट आज भी हो रहा है। अजमेर जीआरपी क्षेत्र में विगत 6 माह में बड़ी मात्रा में अफीम पकड़ी गई है। हाल ही में 1 किलो 400 ग्राम चरस ट्रेन से पकड़ी गई, जिसकी कीमत अंतराष्ट्रीय बाजार में 13 लाख बताई जा रही है। जीआरपी में वर्ष 2016 से अब तक एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अफीम, डोडा पोस्त, चरस, गांजा पकड़ा गया।


जानकारी के मुताबिक 19 कार्रवाईयां जीआरपी पुलिस कर चुकी है। इनमे बड़ी मात्रा में अफीम तस्करी की वारदातें शामिल हैं। पश्चिम बंगाल के मालदा कस्बे से यह अफीम अजमेर होती हुई मारवाड़ के कई कस्बों में जाती रही है। इसी तरह अजमेर नार्कोटिस ब्यूरो ने अपने सर्किल में 6 बड़ी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की। वही जिला पुलिस के 32 थानो में छोटे स्तर पर कार्रवाई की गई।


चूकि अजमेर और पुष्कर तीर्थ और पर्यटन नगरी है, इस लिहाज से रोज हजारों की तादाद में लोग अजमेर—पुष्कर भ्रमण पर आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं। सस्ते नशे की चाहत में कई विदेशी पर्यटक तस्करों के ग्राहक बन जाते हैं। यही वजह कि नशे की डिमांड की वजह से अजमेर पुष्कर में नशे का कारोबार भी कुछ वर्षों से फलने फूलने लग गया है।


लिहाजा अब कहा जा सकता है कि ट्रांजिट पॉइंट ही नहीं, बल्कि नशे के कारोबार की जड़ें अब अजमेर में पूरी तरह जम चुकी है। ऐसे में पुलिस को चाहिए कि फोरी कार्रवाई नहीं करके नशे के बड़े सौदागरों पर शिकंजा कसे। जाहिर है अजमेर अब स्मार्ट सिटी बन रहा है, तो पुलिस को भी स्मार्ट बनना होगा। तभी नशे के बढ़ते कारोबार पर लगाम कस पाना  संभव हो सकेगा।

 

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