अजमेर में कबूतरों के बीच हुई अनोखी प्रतियोगिता, आप भी जानकर होंगे हैरान

Published Date 2017/02/04 20:37, Written by- Priyank Sharma

अजमेर। अजमेर में कबूतरबाजी का खेल सदियों पुराना है। देश में दिल्ली और अजमेर में ही कबतुरबाजी का शौक आज भी परवान पर है। इसी को लेकर अजमेर में ढ़ाई सौ लोग आज भी न सिर्फ देशी—विदेशी नस्ल के कबूतर पालते हैं, बल्कि उन्हें प्रतियोगिता के लिए ट्रेनिंग भी देते हैं। आप भी सोच में पड़ गए ना कबूतरों के साथ कैसी प्रतियोगिता। दरअसल, ये प्रतियोगिता है खुले आसमान में सबसे ज्यादा ऊंचाई छूने की कबूतरों के रेस की प्रतियोगिता।


आपने बॉलीवुड फिल्मों में देखा होगा कि प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्रेम का संदेशा देने के लिए कबूतर को खत लेकर भेजता है। माना जाता है कि सदियों पहले संदेश भेजने के लिए कबूतरों का ही उपयोग हुआ करता था। वक़्त के साथ कबूतर पालने वाले भी कम हो गए। अजमेर में सदियों से पुश्त दर पुश्त कई लोग कबूतर पालते आए हैं। आज भी करीब ढ़ाई सौ लोग कबूतर पालने के शौक को ज़िंदा रखे हुए हैं, जिनके पास कई देशी विदेशी कबूतर मौजूद हैं और जिनके दाना—पानी के साथ हर रोज ट्रैनिंग भी जरुरी है।


अजमेर में ऐसे ही एक बड़े कबतुरबाज हैं, ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के खादिम गनी गुरदेजी। गुरदेजी के पास सैकड़ों देशी विदेशी नस्ल के कबूतर हैं। कई लोग उनसे कबूतरबाजी का हुनर सिख चुके हैं। आज उन्हीं लोगों ने गनी गुरदेजी को उस्ताद की पदवी से नवाजा है। इसके लिए बाकायदा शहर के सभी कबूतरबाजों को बुलाया गया। वहीं उस्ताद के कबूतरों की रेस भी करवाई गई, जिसमें करीब 400 से अधिक कबूतरों को रेस में शामिल किया गया।


आसमान में उड़ान भरते रंग बिरंगे कबूतरों की रेस ने अजमेरवासियों को भी रोमांचित कर दिया। उस्ताद ने जैसे ही पिंजरे से कबूतरों को खुले आसमान में आज़ाद किया तो सैकड़ों कबूतर हवा में एक साथ उड़ान भरते दिखे। कभी इधर कभी उधर, कभी नीचे तो कभी ऊपर। उस्ताद के संकेतों पर कबूतर हर आदेश का पालन करते दिखे। आयोजन में कबूतरों की रेस के साथ ही पुराने कबूतरबाजों का भी सम्मान किया गया। ख़ास बात यह रही कि अजमेर की गंगा—जमुना संस्कृति की झलक भी कबूतरबाजों के बीच देखने को मिली।


शांति के प्रतीक कहलाने वाले कबूतरों कई धर्मों में भी दाना डालने पर पुण्य कमाने की परम्परा रही है। कबूतरबाजों का शौक भले ही महंगा हो, मगर इस शौक को ज़िंदा रखने वाले लोग कबूतरों को पालने के साथ साथ उनका संरक्षण भी कर रहे हैं। देश में कई जगह कबूतरबाजी का शौक इतिहास की बात हो चला है, मगर अजमेर के लोगों ने आज भी कबूतरबाजी के शौक को परवान चढ़ा रखा है।

 

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