worried child got treatment after four hours waiting of a doctor

चिकित्सक के इन्तजार में चार घंटे तड़पने के बाद मिला बच्चे को उपचार

Published Date-04-Jan-2017 05:06:07 PM,Updated Date-04-Jan-2017, Written by- Priyank Sharma

अजमेर। चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के कितने ही दावे सरकारी तौर पर किये जा रहे हों, मगर व्यवस्थाओं की हकीकत वही समझ सकता है, जो इनसे रूबरू होता है। अव्यवस्थाओं की बात जब संभाग स्तर के अस्पताल की हो तो मामला चिंतनीय और सोचनीय बन जाता है। अजमेर संभाग के सबसे बड़े जेएलएन अस्पताल में पिछले कुछ सालों में सुधार आया है। यह सुधार अस्पताल की इमारत में समझा जा सकता है, मगर चिकित्सीय व्यवस्था के हालात आज भी लचर है।


संभाग के सबसे बड़े अस्पताल का दर्जा प्राप्त जेएलएन अस्पताल अव्यवस्थाओं को आलम ये है कि यहां मरीज घंटों इलाज के लिए तड़पता रहता है। चिकित्सक मरीज को फुटबॉल बनाकर यहां—वहां चक्कर लगवाते रहते हैं। इस बीच अस्पताल का ट्रॉली मैन भी थक—हार कर मरीज को उसके हाल पर कहीं भी छोड़कर पतली गली से निकल लेता है। मरीज बीमारी से और परिजन परेशानी से अपनी किस्मत को कोसते रहते हैं।


अलसुबह दिल्ली-अजमेर ट्रेन से रेलवे स्टेशन पर उतरे अजमेर निवासी गोपाल के बच्चे को  अचानक से मिर्गी का दौरा पड़ने लगा। जैसे तैसे बच्चे को लेकर गोपाल जेएलएन अस्पताल पहुंचा, जहां वह अपने बच्चे को लेकर सुबह करीब 7 बजे आपातकालीन वार्ड में पहुंचा। यहां पहुंचने के बाद उसने करीब दो घंटे तक चिकित्सक का इन्तजार किया। इसके बाद एक रेजिडेंट चिकित्सक आया तो उसने मनोचिकित्सक वार्ड भेज दिया। वार्ड में चिकित्सक नहीं होने पर स्टाफ ने इन्तजार की सलाह दे डाली।


सर्दी के मौसम में फिर दो घंटे का इन्तजार। परिजन मजबूरी में चिकित्सक का इन्तजार कर रहे थे कि ट्रॉली मैन बच्चे को वार्ड के बाहर छोड़ गया। बच्चे के इलाज की उम्मीद में चार घंटे का इन्तजार परिजनों को दुःख के पहाड़ पर चढ़ने से कम नहीं लग रहा था। मगर अस्पताल में संवेदनहीनता का आलम कम नहीं हुआ। इलाज बच्चे को 11 बजे तक जाकर मिल पाया। ऐसे में एक बात तो स्पष्ट है कि संभाग स्तर के अस्पताल में भी आपातकालीन व्यवस्था अव्यवस्थाओं और चिकित्सकों की मनमर्जी की बदौलत नाम की रह गई है।

 

Ajmer Rajasthan JLN Ajmer Jawahar Lal Nehru Hospital Emergency Ward

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