Arthuna temples of 11th-century might be the center of Tourism and research

पर्यटन और शोध स्थली बन सकते हैं 11वीं सदी के अर्थूना मंदिर

Published Date-27-Sep-2016 04:10:06 PM,Updated Date-02-Dec-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

बांसवाडा। ग्यारहवीं सदी में मोहम्मद गजनवी के आक्रमण का शिकार हुए अर्थूना के शिव और हनुमान मंदिर के अवशेष इस बात का प्रमाण देते हैं कि कभी यह स्थली लोगों के आकर्षण और श्रद्धा का केन्द्र रही होगी। पिछले एक दशक से पुरात्तव विभाग इसके संरक्षण के प्रयास कर रहा है, लेकिन यहां से अधिकांश प्रतिमाएं गायब हो चुकी है। गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा से लगते इस जिले में यह स्थान पर्यटन और शोधस्थली का रूप ले सकता है, लेकिन जरूरत है इस ऐतिहासिक स्थली के नियोजित विकास की है।


यहां पर चाचाकोटा माही बैक वाटर का क्षेत्र है, जहां प्रकृति मेहरबान नजर आती है। पानी टापू और पास की पहाड़ी पर काली हेलघाम स्वर्ग से कम की अनुभूति नहीं कराते। गौरतलब है कि आईएएस एवं आईपीएस से लेकर प्रशिशु अधिकारी भी यहां आकर अभिभुत होते हैं। इन्हीं सबको लेकर इसके विकास की योजना के अब प्रयास चल रहें है।

 

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