Corn crop also on the verge of destruction after soybean

सोयाबीन के बाद अब मक्का की फसल भी बर्बादी की कगार पर

Published Date-24-Nov-2016 04:26:38 PM,Updated Date-24-Nov-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

बांसवाडा । माही को यों तो बांसवाडा की जीवन रेखा माना जाता है लेकिन निर्माण के बाद बजट के अभाव में नहरें अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही है। आलम तो ये हो गया है कि नहरें मिट्टी से इतनी भर गई है कि अब पानी निकल कर खेतो में भरता जा रहा है। इधर नई सड़क बनने से नहरें नीची होती जा रही हैं| लोग सरकारी दफ्तरों में चक्कर काट-काट कर परेशान हो चुके हैं। ई-सुगम में भी शिकायत दर्ज कराई जाती है, लेकिन झुठी रिपोर्टो से मामला निस्तारित हुआ बता दिया जाता हैं।

 

ठिकरिया से सांगरीपाडा वाया नवा गांव के छत्रसालपुर के खेत जलमग्न दिखाई दे रहें हैं| सोयाबीन की फैसले तो इसके चलते बर्बाद हो चुकी है| अब ये लोग मक्का की फसल बो रहें है लेकिन नाकामयाबी के बादल किसानों के चहरे पर मण्डरा रहें हैं। आक्रोशित किसान कहते हैं कि फसल हानी, राष्ट्र हानी ऐसे में गैर-जिम्मेदार रवैया अपनाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और गलत रिपोर्ट देने वालों पर का मुकदमा चलाना चाहिए। इस संबंध में जिला कलक्टर को ज्ञापन भी दिया गया।

 

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