सचिन पायलट को ही नहीं पहचान पाया कांग्रेसी कार्यकर्ता, गेट पर ही बांह पकड़कर रोका

Published Date 2016/10/13 22:08,Updated 2016/10/13 22:08, Written by- FirstIndia Correspondent

बीकानेर। कांग्रेस की गुरुवार को बीकानेर में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में जाते समय प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट को उस वक्त एक अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उन्हें सेवादल के एक कार्यकर्ता ने बैठक हॉल के गेट पर ही रोक दिया। सेवादल कार्यकर्ता पायलट को पहचान ही नहीं पाया और उन्हें बांह पकड़ कर किनारे कर दिया। सचिन पायलट गांधी टोपी पहने हुए थे और सेवादल कार्यकर्ता ने यह तर्क दिया कि इसी वजह से वह पायलट को नहीं पहचान पाया। 


दरअसल, पार्क पेरेडाइज के हॉल में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई, वहां मुख्य दरवाजे पर पर सेवादल कार्यकर्ताओं को व्यवस्था संभालने का जिम्मा दिया गया था। बैठक में शामिल होने के लिए सचिन पायलट प्रदेश प्रभारी गुरदास कामत, सह प्रभारी मिर्जा इरशाद बेग, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ अंदर जा रहे थे। पायलट जैसे ही अंदर जाने लगे सेवादल कार्यकर्ता ने उन्हें रोका और बांह पकड़कर किनारे करने लगा, यह करते देख आसपास खड़े नेताओं—कार्यकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी और पायलट की बांह छुड़वाई। हालांकि इस दौरान सचिन पायलट सहज बने रहे और कार्यकर्ता से कुछ नहीं कहा। पायलट ने कहा कि शायद टोपी में होने की वजह से कार्यकर्ता पहचान नहीं सका। 


पायलट को रोकने पर उठे सवाल, कहीं गुटबाजी के चलते जानबूझकर तो नहीं किया ऐसा : 
कांग्रेस सेवादल के कर्यकर्ताओं को बाकायदा व्यवस्थाएं संभालने की पूरी ट्रैनिंग होती है और वे सभी नेताओं को अच्छी तरह से जानते हैं। पायलट को बैठक हॉल के गेट पर रोके जाने की घटना पर कांग्रेस के कुछ जानकार सवाल उठा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सेवादल का कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष को नहीं पहचाने ऐसा नामुमकिन है। सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष बने लंबा अरसा हो चुका है और मीडिया कवरेज भी उन्हें अच्छा मिलता है, ऐसे में राजनीति में साधारण सी दिलचस्पी रखने वाला व्यक्ति भी उन्हें पहचानने में गलती नहीं करेगा। सवाल यह है कि सेवादल कार्यकर्ता पहचानने में गलती कैसे कर सकता है। इस घटना को कांग्रेस के भीतर फैली गुटबाजी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 


प्रदेशाध्यक्ष रहते चंद्रभान का भी पास नहीं बना था, सोनिया तक पहुंचने के लिए लगानी पड़ी थी दौड़ :
कांग्रेस में यह पहला मौका नहीं है, जब प्रदेशाध्यक्ष के साथ इस तरह की घटना हुई है। गुटबाजी के चलते पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी है। अगस्त 2012 में सोनिया गांधी ने जयपुर के पास बास बदनपुरा में पानी में डूबी बस्तियों का दौरा किया था। सोनिया गांधी के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री अशाोक गहलोत और वरिष्ठ नेता थे। तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष चंद्रभान का सिक्योरिटी पास ही नहीं बना, जिसके कारण सुरक्षाकर्मियों ने उनकी गाड़ी को आगे नहीं जाने दिया था। मजबूरन चंद्रभान को गाड़ी से उतरना पड़ा और सोनिया गांधी तक पहुंचने के लिए दौड़कर जाना पड़ा। यह तस्वीर उस समय अखबारों में छपी और उसकी खूब चर्चा में रही। बाद में खुलासा हुआ कि पीसीसी के कुछ पदाधिकारियों ने जानबूझकर पास बनवाने में कोताही बरती और इसके कारण प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए भी उन्हें ऐसे बरताव का शिकार होना पड़ा। चंद्रभान के साथ हुई इस घटना को गुटबाजी का परिणाम माना गया था। सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए भी बैठक हॉल के बाहर जिस तरह रोका गया उसके पीछे भी गुटबाजी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

 

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