वो कौन था...!! भाग 1

वो कौन था...!! भाग 1

28-Dec-2016, Written by- Anurag Sharma
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जल्दी जल्दी हड़बड़ाते हुए हाथों से पैकिंग कर ही रहा था कि पीछे से माँ की चिंता भरी आवाज आई | अरे पर्स चश्मा घडी तो यही भूल रहा है, क्या पैकिंग करता है तू ,ले पीछे हट मैं करती हूँ |


Blog Story By Anurag Sharma,

जल्दी जल्दी हड़बड़ाते हुए हाथों से पैकिंग कर ही रहा था कि पीछे से माँ की चिंता भरी आवाज आई | अरे पर्स चश्मा घडी तो यही भूल रहा है, क्या पैकिंग करता है तू ,ले पीछे हट मैं करती हूँ | बिलकुल ही लापरवाह है ,भगवान जाने कैसे तू शहर में अपनी देखभाल करता होगा | वैसे भी शहर में रह के सुख के काटा हो गया है | पता नहीं टाइम पे खाना खाता भी है कि नहीं जहाँ तक है पिज़्ज़ा बर्गर ही खाके पेट ख़राब करता होगा | मैं पीछे खड़ा माँ की चिंता से भरी प्यारी बातो में खोया हुआ ही था कि पापा में जेब में कुछ पैसे रख के कहा ये ले तेरी खर्ची | मैं मना करता उससे पहले ही उन्होंने टोक दिया रख ले काम आयेगे |

मैंने भी हार मान के पैसे रख लिए | प्यार की नैया में खोया हुआ ही था कि घडी के भागते हुई काटो पे नजर पड़ी कि वक्त जाने का हो गया है | जैसे तैसे घर से निकल के टैक्सी को बुला ही रहा था कि ख्याल आया की क्यों ना आज थोड़ा पैदल चल के ठंडी और खुशनुमा सुबह का मजा लिया जाए | वैसे भी शहर कि दौड़ती भागती जिंदगी में खुद के लिए टाइम निकलना मुश्किल हो जाता है, तो सुबह की खूबसूरती को देख पाना तो प्रभु राम से मिलने जैसा हो जाएगा | सो निकल लिया पैदल ही बस स्टैंड की ओर | सुबह की हवा का आनंद ले ही रहा था कि रस्ते में पड़ने वाली पान की दुकान से महेंद्र भैया की आवाज आई क्यू बेटा शहर चल दिए, हो गयी छुट्टिया खत्म | मैंने भी मुस्कुराते हुए गर्दन के इशारे से हामी भर दी | उन्होंने भी मुस्कुराते हुये संभल के जाने का इशारा कर दिया | कुछ दूर चला ही था कि फूलती हुई सासो ने बताया की शहर के प्रदुषण ने मेरे फेफड़ो को वेंटिलेटर पे लेटा दिया है | और जल्द ही हालात न सुधरे तो टी टॉक भगवान के साथ ही होगी | खैर जैसे तैसे बस स्टैंड पहुंच गया | वहाँ पड़ी खाली सीट को देख के जान में जान आई | बैठ के सासो पे काबू कर के बस का इंतजार कर ही रहा था कि एक मेरी उम्र का लड़का मेरे पास आ बैठा | उसने मुस्कुराते हुये देखा ओर बोला क्या हुआ बस का इंतजार कर रहे हो | सवाल तो बेतुका था क्योकि कोई भी बस स्टैंड पे बैठ के ट्रैन का इंतजार तो करेगा नहीं पर मैंने भी गर्दन हिला के हां का इशारा कर दिया |

इतने में ही एक छोटा सा लड़का अखबार मेरे ओर बढ़ाते हुये बोला बाबूजी ले लो केवल 2 रुपए का है | हाय रे ये बाल मजदूरी जो मज़बूरी में बच्चो का बचपन खत्म कर रही है |

ये सब सोच के जेब में से 2 का सिक्का निकाल के उसके हाथ पे रख दिया | ओर वो भी पैसे देखते ही ख़ुशी से उछलते हुये अखबार हाथ में थमा के चला गया | अखबार को खोला ही था कि सामने नजर पेज के किनारे छोटी सी खबर पे आ के रुक गयी | लिखा था घुमचककर जहाँ बस स्टैंड भी है, एक लड़के ने जिसका नाम राहुल था, प्रेम प्रसग के चलते चाय में सल्फॉस की गोलियां डाल के चाय पी और खुदख़ुशी कर ली | और जब जहर अंदर गया तो तड़प तड़प के वह लड़का वहीं चाय की दूकान के सामने वाली सड़क पे दम तोड़ गया | आस पास के लोगो ने उस लड़के को बचाने की बहुत कोशिश की पर वह लड़का जैसे जीना ही नहीं चाह रहा था | खबर पढ़ते पढ़ते मन में गुस्सा और अफ़सोस दोनों ही भावना का अहसास हुआ | और यदा कदा की मुंह से निकल गया कि आज कल के युवा को हो क्या गया है | क्या दिमाग कहीं रख के भूल गए है | अपने माँ बाप का कुछ भी ख्याल नहीं है | बेचारे किस आशा के साथ हमें पालते हैं और हम उन्हें किस हद तक दुःख देते हैं | क्या एक बाप इस दिन के लिए बेटे को पालता है कि वो उसकी अर्थी उठाये | उस बाप के लिए कितना दर्दनाक लम्हा होगा वो | इस उधेड़ बुन में डूबा हुआ ही था कि बगल में बैठे लड़के की आवाज ने मेरा ध्यान तोडा |

अरे भाई इतना गुस्सा क्यू करते हो पहले ये तो जान लो कि उस लड़के ने खुदखुशी क्यूं की | कोई तो कारण रहा होगा | उसके इस कदम के पीछे वार्ना कौन मरना चाहेगा | शायद कोई मज़बूरी रही हो या कोई उलझन |

पहले मामले की तह तक जाके सारी मालूमात तो करो | मैंने लड़के की तरफ आश्चर्य से देखते हुये कहा कि तुम लोग ही हो जो आज की युवा पीढ़ी को बहला फुसला रहे हो तुम लोगों के कारण ही आज कल लड़के लड़कियां प्यार जैसी फिजूल चीजो में पड़ के अपनी जिंदगी को तबाह कर रहे हैं | तुम लोगों की गलत शिक्षा और बेबुनुयादि सलाह उन्हें खुदखुशी जैसे कदम उठाने पे मजबूर करते हैं | क्या ,ये ही चीजे जिंदगी में रह गयी है ,करने को, कोई और काम या कोई और मकसद नहीं है जीवन में | मैं बोल ही रहा था की उसने कहा भाई पहले तो प्यार कोई चीज नहीं है और थोड़ा शांत हो जाओगे, तो मैं कुछ समझा या अपनी बात रख पाउँगा | थोड़ा शांत होते हुये मैंने भी अकड़ के कहा, कहो क्या कहना चाहते हो | उस लड़के ने बड़े ही शांत और ठन्डे स्वर में कहा कि प्यार एक अहसास है जो आपको अलग अलग रिश्तों के हिसाब से अलग अलग महसूस होता है | जैसे माँ बाप से प्यार, हमारे भाई बहन से प्यार ,हमारे रिश्तेदारो से प्यार, अपने प्रियवर से प्यार, अपनी मनपसंद की चीजो से प्यार | और जब ये प्यार अहसास और आपके दिल और दिमाग पे हावी होता है तो आप केवल मोह प्यार के अनुभव से बंध जाए तो हो | आप का दिमाग काम करना बंद कर देता है और आप केवल अपने दिल की बात को सुन के उस एक अहसास के लिए वो सब कुछ कर जाते हो जो आप न कर सकते हो या न करना चाहते हो | शायद ऎसे ही किसी अहसास के चलते उस लड़के ने भी मजबूर हो कर के खुदखुशी जैसा कदम उठाया हो | जहाँ तक मेरी जानकारी है लड़का अपने ही किसी दूर की रिश्तेदार लड़की ये प्यार कर बैठा था और दुनिया कि नज़र में वे आपस में भाई बहन के रिश्ते में थे | पर प्यार का अहसास दिमाग पे इतना था कि न वो ये रिश्ता अपना पा रहे थे न ही एक दूसरे को भुला पा रहे थे | उन दोनों में प्यार इतना गहरा था कि जैसे पानी एक पिए और प्यास दूसरे की भुझे | जैसे हर धड़कन केवल एक दूसरे के लिए ही चल रही हो | पर समाज के चलते एक दूसरे के हो नहीं सकते थे |

उक्सुकता वश मैंने बीच में टोकते हुये कहा कि क्या वाकई में वो दोनों भाई बहन थे | उसने कहा नहीं वैसे तो नहीं थे पर लड़का उस लड़की के घर किराये पे रहता था और जब मुख सुख के चलते मकान मालिक को वो मामा मामी कहता था | तो इस तरह से वे सामाजिक रूप से भाई बहन थे | पर दिल पे किस का जोर चलता है | वो ना तो धर्म देखता है, ना ही उम्र और ना हालात, बस वो तो हो जाता है | ये प्यार का बंधन ही ऐसा होता है कि आप इसके आगे मजबूर होते है | एक बार प्यार होने पे आप बस प्यार के रह जाते है | प्यार ही आपका मकसद बन जाता है और ठीक इसी तरह प्यार में असफल होने पे हर ख़ुशी और मकसद टूट और खत्म हो जाता है |

यही तो मैं भी तो यही कह रहा हूँ , कैसे ? जिंदगी में कोई और मकसद नहीं बनाया जा सकता | कहते हुये मैंने उसकी बात काटी | अगर ये लड़का प्यार में असफल हो भी गया था तो अपने घर वालों के लिए जिता कुछ और करता किसी और प्यार की तलाश करता | मरना किसी भी मुश्किल का हल नहीं होता | माना प्यार में एक ना होने पे दर्द और तकलीफ होती है पर मुश्किल को आसान करने की बजाये खुदखुशी ? कोई राह बिलकुल नहीं हो सकती |
वह बोला शायद आप सही है शायद कोई और रास्ता होगा पर उस समय कुछ समझ में नहीं आता | दिमाग आप का साथ छोड़ देता है और मन उस पसंद की वस्तु को देख मचल जाने वाले बच्चे के जैसा हो जाता है | जो रोता है तड़पता है और हर वो कोशिश करता है कि वो केवल वह वस्तु पा सके | खैर छोड़िये | आप अभी मेरी बातो को केवल सुन सकते है समझ नहीं सकते | जिस दिन आप का दिल दिमाग पे हावी होगा और आप उस प्यार के अहसास को महसूस करोगे तब मैं तुमसे आके यही सवाल जवाब करुगा |

हम बात ही कर रहे थे कि बस के हॉर्न ने दोनों का ध्यान तोड़ते हुये अपने बातचीत को विराम लगाने का संकेत दिया | मैंने भी सामान उठाते हुये कहा कि ये बातचीत अभी बाकि है मेरे दोस्त और बस कि और चल पड़ा | बस में पैर रखते हुये मैंने पलट के देखा तो वह लड़का वही खड़ा था | मैंने याद करते हुये सोचा कि मैने इस लड़के का नाम तो पूछा ही नहीं और आवाज लगाई कि अरे भाई तुम हो कौन ? इतना सब कैसे जानते हो ? आखिर नाम क्या है तुम्हारा ? उसने भी मुस्कुराते हुये जवाब दिया की मेरा नाम राहुल है और मैं वहीं लड़का हूँ | ये कह के वह लड़का गायब हो गया |

पहले तो मैं हड़बड़ाया और आश्चर्य से आँखों को मसलने लगा की कही धोखा तो नहीं हो गया | पर वहा किसी को भी ना देख के चुपचाप बस की सीट पे बैठ गया और सोचने लगा कि क्या ये सच था या केवल मेरे मन का वहम | क्यूं आया था वो आखिर कौन था वो |

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