Myanmar will export 14 million tonnes of पल्सेस 52565

म्‍यांमार करेगा 14 लाख टन दलहन का निर्यात

Published Date-30-Jun-2016 12:51:40 PM,Updated Date-30-Jun-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

म्‍यांमार दो साल कम उत्‍पादन के बाद इस साल तकरीबन 14 लाख टन दलहन का निर्यात करेगा। म्‍यांमार ने इस बार मध्‍य पूर्व और अमरीका जैसे नए बाजारों को लक्ष्‍य बनाया है।

म्‍यांमार प्‍लसेस, बीन्‍स एंड सीसम सीड मर्चेंटस एसोसिएशन के प्रमुख यू टून लाविन का कहना है कि म्‍यांमार हर साल 10 लाख टन से ज्‍यादा दलहन निर्यात करता है और कीमत की दृष्टि से यह एक अरब अमरीकी डॉलर की होती है। वर्ष 2015-16 में म्‍यांमार ने 11 लाख टन दलहन का निर्यात किया था जिसमें उड़द एक दशक के उच्‍च स्‍तर1800 अमरीकी डॉलर प्रति टन पहुंच गई थी। म्‍यांमार के लिए भारत सबसे बड़ा दलहन निर्यातक देश है। 


म्‍यांमार में इस समय उड़द 1500अमरीकी डॉलर प्रति टन चल रहा है। लाविन का कहना है कि उड़द के दाम आने वाले दिनों में फिर से बढ़ सकते हैं, हालांकि, यह इसकी आपूर्ति पर निर्भर होगा। भारत की मजबूत मांग से उड़द के दाम 2000अमरीकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच सकते हैं एवं किसानों की आय काफी बढ़ सकती है। बता दें कि म्‍यांमार पिछले दो साल से यूरोपीयन संघ को भी दलहन निर्यात कर रहा है एवं अब अमरीका, मध्‍य पूर्व को नए बाजार के रुप में जोड़ रहा है। यूरोपीयन संघ अब म्‍यांमार के साथ जुड़ रहा है जिससे दलहन के दाम बढ़ने की संभावना है। म्‍यांमार चीन को भी मूंग बेच रहा है लेकिन अब ऊंचे दाम पाने की उम्‍मीद में दूसरे बाजार तलाशे जा रहे हैं।

ऊंचे दाम पाने की उम्‍मीद में म्‍यांमार अब मध्‍य पूर्व और अमरीका में अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। यदि अच्‍छे भाव मिले तो म्‍यांमार की योजना उच्‍च क्‍वॉलिटी की दलहन पैदा करने का है। बेहतर बीज न होने और भावो में उतार-चढ़ाव होने से म्‍यांमार में उत्‍पादन संभावनाएं प्रभावित होती हैं। लेकिन अब किसान अंतरराष्‍ट्रीय मानकों के अनुरुप दलहन की बोआई शुरु कर रहे हैं एवं वैश्विक मांग के अनुसार फसलों को चुन रहे हैं। मध्‍य पूर्व देशों को मोटे दलहन चाहिए जबकि म्‍यांमार बारीक दलहन की पैदावार करता है।


दूसरी ओर, ओवरसीज एग्रो ट्रेडर्स एसोसिएशन ऑफ म्‍यांमार के मुखिया सुनील शेठ का कहना है कि म्‍यांमार का दलहन निर्यात दो गुना पहुंच सकता है लेकिन इसके लिए सुधारों (रिफॉर्म) की आवश्‍यकता है। सुनील शेठ जो कि म्‍यांमार में टाटा समूह के मुखिया भी है, ने कहा कि म्‍यांमार का अगले तीन से चार साल में कुछ सुधारों के बाद दलहन निर्यात 1.5 से 2 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच सकता है। ओवरसीज एग्रो ट्रेडर्स एसोसिएशन ऑफ म्‍यांमार अगले कुछ महीनों में नए प्रशासन के साथ बैठक करेगी और जरुरी सुधारों पर अमल करने के लिए विचार विमर्श किया जाएगा। असल में म्‍यांमार में पिछले चार-पांच साल से दलहन का उत्‍पादन लगभग ठहर गया है। म्‍यांमार को बेहतर क्‍वॉलिटी बीज, अधिक उपज देने वाले बीज और कीट हमलों से सुरक्षा की जरुरत है जिससे उत्‍पादन में काफी बढ़ोतरी हो सकती है।


वर्ष 2015-16 में म्‍यांमार ने 11 लाख टन दलहन का निर्यात किया जबकि दो साल सप्‍लाई घटने के बाद इस साल यह निर्यात 14 लाख टन पहुंचने की उम्‍मीद है। बता दें कि म्‍यांमार में पैदा होने वाली कुल दलहन का 80 फीसदी हिस्‍सा भारत को निर्यात किया जाता है। म्‍यांमार अब अमरीकी और मध्‍य पूर्व बाजारों की ओर भी मुड़ रहा है। उड़द के मामले में म्‍यांमार अलग ही है एवं दलहन बाजार में यह कनाडा और आस्‍ट्रेलिया से अछूता है लेकिन इसे अफ्रीकन देशों से प्रतिस्‍पर्धा की जरुरत पड़ेगी।

अमरीकी कृषि विभाग (यूएसडीए) नेे म्‍यांमार (बर्मा) में मौजूदा दलहन फसल वर्ष 2015-16 में दलहन उत्‍पादन में कमी आने की बात कही है। यूएसडीए के मुताबिक फसल वर्ष 2015-16 में बर्मा में दहलहन उत्‍पादन 42.20 लाख टन रहने की संभावना है जो पिछले साल 52.80 लाख टन था। इस तरह दलहन उत्‍पादन में भारी गिरावट देखी जा रही है। यूएसडीए ने वर्ष 2016-17 के लिए दलहन उपज फिर से बढ़ाकर 51.60 लाख टन आंकी है। बता दें कि बर्मा के कुल दलहन उत्‍पादन में 80 फीसदी हिस्‍सा तुअर, उड़द और मूंग का होता है।

यूएसडीए ने बर्मा से दलहन निर्यात 2015-16 में केवल 14 लाख टन रहने का अनुमान जताया है जबकि वर्ष 2014-15 में यह निर्यात 15.40 लाख टन था। रिपोर्ट में वर्ष 2016-17 में दलहन निर्यात 14.50 लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है। 

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