huge discrepancies in Soil Health Card Scheme

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम : जांच में सामने आई भारी गड़बड़ियां,, निजी लैब संचालक कागजों में दिखा रहे थे सैंपल

Published Date-17-Apr-2017 02:58:34 PM,Updated Date-17-Apr-2017, Written by- Dinesh Kumar Dangi

जयपुर। राजस्थान की सरजमी से शुरु हुई सोयल हैल्थ कार्ड स्कीम में अब भ्रष्टाचार की बू भी आने लगी थी। राज्य के कृषि विभाग ने स्कीम के तहत समय पर किसानों को कार्ड देने के लिए निजी कंपनियों की लैब को आउटसोर्सिंग के जरिए यह काम दिया गया था। इसके लिए दो तीन प्राइवेट कंपनियों की करीब 70 लैब से अनुबंध किया गया, लेकिन निजी कंपंनियों ने कागजों में ही मिट्टी औऱ पानी के नमूने लेने का खेल खेलना शुरु कर दिया।


पिछले दिनों जब कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने अपने गृह जिले टोंक में निजी कंपनियों की लैब का अचानक दौरा किया तो यह गड़बड़झाला सामने आय़ा। जांच में सामने आय़ा कि कंपनियों ने कागजों में हजारों नमूने रिकॉर्ड में दिखा रखे थे, लेकिन एक भी किसान को सोयल हैल्थ कार्ड जारी नहीं करने का बड़ा झूठ भी पकड़ में आय़ा। कृषि मंत्री ने इसके आधार पर सभी निजी कंपनियों के नमूनों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है।


जांच में गड़बड़ी उजागर करने के बाद इन कंपंनियों के खिलाफ कार्रवाई होनी तय है। प्राइवेट लैब संचालकों को विभाग से प्रति टेस्ट 127 रुपए दिए जाने तय किए गए थे, जिसे लेने के लिए कम्पनियों ने कागजों में सैंपल दर्ज करने शुरु कर दिए। हालांकि समय रहते गड़बड़ी पकड़े जाने से आर्थिक रुप से विभाग को चपत लगने से बच गई।

 

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