paper leak accused sent on 5-day police remand

'तुम मुझे पैसे दो, मैं तुम्हें पेपर दूंगा....' पेपर लीक करने वाले सभी आरोपी 5 दिन के पुलिस रिमांड पर

Published Date-18-Apr-2017 07:53:27 PM,Updated Date-18-Apr-2017, Written by- Ramswaroop Lamror

जयपुर। विश्वविद्यालयों के स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक करने वालों का कुनबा बढ़ता जा रहा है। एसओजी अब तक एक के बाद एक 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपियों की संख्या में अभी और इजाफा होगा। एसओजी ने सभी आरोपियों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है।


युनिवर्सिटी की परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक करने के मामले में एसओजी लगातार गिरफ्तारियां कर रही है। सोमवार शाम तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद देर रात को पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब तक तीन स्टूडेंट्स और एक बुक डिपो कर्मचारी सहित 13 जनों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसओजी ने 12 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के कारण आरोपियों को एसीजेएम 12 में पेश किया गया।


कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। इनमें राजस्थान विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के एचओडी प्रो. जेपी जाट, वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर गोविन्द पारीक, रिटायर्ड प्रोफेसर बीएल गुप्ता, राजकीय महाविद्यालय खाजूवाला के प्राचार्य एनएस मोदी, एसएसजी पारीक कॉलेज चौमूं के व्याख्याता शम्भूदयाल झालानी, अग्रसेन कॉलेज भादरा के व्याख्याता कालीचरण शर्मा, कालाडेरा कॉलेज का व्याख्याता शंकर चौपड़ा, राजस्थान विश्वविद्यालय की गोपनीय शाखा का कर्मचारी नन्दलाल सैनी, रमेश बुक डिपो का कर्मचारी शरद, बांदीकुई में कोचिंग सेन्टर का संचालक चंद्रप्रकाश सिंधी, बांदीकुई निवासी एम कॉम के स्टुडेंट्स अखिल रावत और अजय कुमार सैनी को कोर्ट में पेश करने के बाद 5 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया। एसीजेएम कोर्ट 12 की अभियोजन अधिकारी शालीनी गौतम ने बताया कि 23 अप्रेल को फिर से आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।


वहीं आरोपी एनएस मोदी के बेटे निपुण मोदी को सोमवार देर रात को ही न्यायाधीश के घर पेश करके रिमांड पर लिया गया, क्योंकि निपुण स्टुडेन्ट हैं और मंगलवार को परीक्षा देनी थी। पुलिस कस्टडी में निपुण को परीक्षा दिलवाई और वापस जयपुर लाया गया। कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान आरोपी पक्षों के वकीलों ने पुलिस रिमांड दिए जाने का विरोध किया। उनका तर्क था कि जब पुलिस पिछले दो महीने से तथ्य जुटा रही थी और सोमवार को गिरफ्तारियां की है, तो अब किस बात के लिए रिमांड चाहिए। बचाव पक्ष के वकीलों का दूसरा तर्क यह था कि सोमवार सुबह जब इन्हें उठाया गया तो दोपहर तक परिवारजन अपहरण ही समझ रहे थे। दोपहर बाद मालूम चला कि एसओजी ले गई है, जबकि गिरफ्तारी की जानी थी तो परिवार वालों को सूचना देनी चाहिए थी।


प्रश्न पत्र लीक के इस प्रकरण में आधा दर्जन से ज्यादा गिरफ्तारियां और होने की सम्भावना है, क्योंकि एसओजी की अलग अलग टीमों ने करीब एक दर्जन स्थानों पर छापेमारी करके कई लोगों को हिरासत में लिया है। जैसे जैसे उनकी भूमिका प्रश्न पत्र लीक प्रकरण में पायी जाएगी, वैसे वैसे और गिऱफ्तारियां होती रहेगी। 


गैस पेपर के नाम पर सालों से हो रहे पेपर आउट :
स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने का मामला भले ही एसओजी ने अब उजागर किए हो, लेकिन प्रश्न पत्र लीक होने का सिलसिला सालों पुराना है। गैस पेपर के नाम पर पिछले बीस सालों से प्रश्न पत्र लीक होते आए हैं। कई छात्र विभागाध्यक्ष या प्रोफेसर से संभावित प्रश्न लिखवाकर लाते रहे हैं। प्रोफेसर सात से आठ तक प्रश्न छात्रों को बताते थे, जिनमें से चार या पांच सवाल प्रश्न पत्र में आ जाते थे। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रोफेसर्स द्वारा प्रश्न पत्र में आने वाले सवालों से एक या दो सवाल अतिरिक्त लिखा देते थे, ताकि सीधे तौर उन पर ये आरोप नहीं लगे कि उन्होंने पेपर लीक किया है।


दस साल पहले तो छात्रनेताओं के लेटरहैड पर बनाए गए गैस पेपर फोटो स्टेट की दुकानों पर बैचे जाते थे। इस गैस पेपर में से आधे से ज्यादा सवाल हू-ब-हू प्रश्न पत्र से मिल जाते थे। भूगोल डिपार्टमेंट का मामला तो और भी हैरान करने वाला है। सरकारी और निजी कॉलेजों में प्रेक्टिकल एग्जाम में पर्यवेक्षकों पर वसूली करने के आरोप लगते रहे हैं। पर्यवेक्षक बनने के लिए कई बार विवाद हुए हैं। पिछले दिनों भूगोल डिपार्टमेंट के एचओडी जेपी जाट और प्रोफेसर महिपाल सिहाग में हाथाफाई भी हुई थी। इसके बाद युनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रोफेसर महिपाल सिहाग को निलंबित भी कर दिया था।

 

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