पुण्यतिथि विशेषः राजस्थान की राजनीति में तुम्सा नहीं 'बाबोसा'

Published Date 2017/05/15 14:21, Written by- FirstIndia Correspondent

जयपुर। आज पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। पुण्यतिथि के कार्यक्रम में देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी शिरकत की। भाजपा के कद्दावर नेता भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान की राजनीति में एक ऐसा नाम जिसे शायद ही कोई प्रदेशवासी भुला पाएगा। भैरोसिंह जी को प्रदेश में बाबोसा के नाम से भी जाना जाता है। बाबोसा ने अपने राजनैतिक सफर से राजस्थान को देश मे एक नई पहचान दी। भैरोसिंह जी (बाबोसा) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के साथ—साथ देश के उपराष्ट्रपति का पद भी संभाला है। भैरोंसिंह शेखावत की छवी लोगों और पार्टी नेताओं में आज भी ऐसी है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता, सहीं मायने में शेखावत की पूर्ती प्रदेश ही नहीं देश में कोई भी नेता पूरी नहीं कर सकता है। 

पिता की देहांत के बाद छोड़ी पढ़ाई
भैरोसिंह शेखावत का जन्म 23 अक्टूबर 1923 को तत्कालिक जयपुर रियासत के गांव खाचरियावास में हुआ था। यह गांव अब सीकर जिले में है। इनके पिता का नाम देवी सिंह शेखावत और माता का नाम बन्ने कंवर था। बाबोसा ने गाव की ही पाठशाला में अक्षर-ज्ञान प्राप्त किया। हाई-स्कूल की शिक्षा गांव से दूर जोबनेर से प्राप्त की, जहां पढ़ने के लिए पैदल जाना पड़ता था। हाई स्कूल करने के पश्चात जयपुर के महाराजा कॉलेज में दाखिला लिया ही था कि पिता का देहांत हो गया और परिवार के आठ प्राणियों का भरण-पोषण का भार कंधों पर आ गया, फलस्वरूप हल हाथ में उठाना पड़ा। बाद में पुलिस की नौकरी भी की पर उसमें मन नहीं रमा और त्यागपत्र देकर वापस खेती करने लगे। वर्ष 1941 में भैरोंसिंह शेखावत का विवाह सूरज कंवर से हुआ था। 

 

दांता रामगढ़ से लड़ा पहला चुनाव, तीन बार रहे मुख्यमंत्री
भैरोंसिंह शेखावत जनसंघ के संस्थापक काल से ही जुड़े हुए थे। जनता पार्टी और भाजपा की स्थापना में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1952 में वे दस रुपए उधार लेकर दाता रामगढ़ से चुनाव के लिए खड़े हुए। इस समय उनका चुनाव चिह्न दीपक था। इस चुनाव में उन्हें सफलता मिली और वे विजयी हुए। इस सफलता के बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार चलता रहा। वे दस बार विधायक रहे और 1974 से 1977 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। अपने लम्बे राजनीतिक सफर में भैरोंसिंह शेखावत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री, तीन बार नेता प्रतिपक्ष और भारत के ग्यारहवें उपराष्ट्रपति भी रहे।


2010 में प्रदेश ने खोया एक कद्दावर
राजस्थान की राजनीति में जोरदार प्रभाव रखने वाले भैरोंसिंह शेखावत का निधन 15 मई, 2010 को जयपुर में हुआ। उन्हें बेचैनी और सांस लेने में तकलीफ की वजह से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां 15 मई, 2010 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर सबसे पहले भाजपा की प्रदेश इकाई के मुख्यालय में लाया गया था। पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए सड़कों पर हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। जयपुर की सड़कों पर भैरोंसिंह अमर रहे की गूँज सुनाई दे रही थी।

 

Rajasthan Ex CM Bhairon Singh Shekhawat Death Anniversary Jaipur Hindi News

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