So are jails becomes the place of rest for the miscreants

...तो क्या बदमाशों के लिए आरामगाह की कोई जगह बनती जा रही है जेल

Published Date-21-Apr-2017 06:25:27 PM,Updated Date-21-Apr-2017, Written by- Ramswaroop Lamror

जयपुर। एक आम आदमी भले ही जेल जाने के नाम से सिहर उठता हो, लेकिन शातिर और खुंखार बदमाशों के लिए जेल किसी आरामगाह से कम नहीं है। वे लोग जेल में बैठकर आराम से अपने गिरोह का संचालन करते हैं। विश्वकर्मा पुलिस की कार्रवाई से आज एक ऐसे ही प्रकरण का खुलासा हुआ है। 22 फरवरी को विश्वकर्मा निवासी एक व्यापारी ने ब्रांडेड कम्पनी की मैगी, चॉकलेट, कॉफी के पैकेट और अन्य सामान ट्रांसपोर्ट कम्पनी के जरिए जोधपुर भेजे थे। जिस ट्रक में सामान भर जोधपुर के लिए रवाना किया गया, उस ट्रक के चालक ने उस सामान को जोधपुर ना ले जाकर अन्यत्र बेच दिया। व्यापारी ने विश्वकर्मा थाने में ट्रक चालक श्रीराम मीणा और खलासी दिनेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।


जांच में पता चला कि श्रीराम और दिनेश ने बीस लाख रुपए के उस सामान को जेल में बंद एक शातिर बदमाश के मार्फत बेच दिया। तफ्तीश में जोधपुर जेल में बंद महेन्द्र जैन का नाम सामने आया। पुलिस महेन्द्र जैन को जोधपुर सेन्ट्रल जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार करके जयपुर लाई है। महेन्द्र जैन की निशानदेही पर पुलिस ने अरविन्द जैन और पृथ्वी सिंह को गिरफ्तार किया है। अरविन्द जैन और पृथ्वी सिंह ने कोड़ियों के दाम पर उस सामान को खरीदा था।


विश्वकर्मा थाना प्रभारी रतन सिंह ने बताया कि वारदात के कुछ दिन बाद उस सामान को बाजार में बेचे जाने की सूचना मिलने पर आसनदास नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। उसने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी थी, जिसके बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए करीब छह लाख रुपए का सामान बरामद भी कर लिया। पुलिस ने पाली के दो व्यापारियों से ये सारा सामान जब्त किया है। थाने का एक कमरा पूरा जब्त किए गए सामान मैगी, चॉकलेट और कॉफी के पैकेट से भर गया। वहीं लाखों रुपए का सामान गायब करने वाले श्रीराम विश्नोई और दिनेश जाट फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से दूर है।


मुख्य आरोपी महेन्द्र जैन शातिर बदमाश है, जिसके खिलाफ ठगी के दर्जनों मुकदमें दर्ज हैं। वर्ष 2012 में सोजतसिटी की आईसीआईसीआई बैंक में नकली सोना रखकर महेन्द्र जैन ने डेढ़ करोड़ रुपए का लोन ले लिया था। करीब एक साल बाद उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया, लेकिन उसी प्रकरण में आईसीआईसीआई के तत्कालीन बैंक मैनेजर अभी तक फरार है।


आरोपी महेन्द्र जैन खुद कहता है कि उसके खिलाफ चैक बाउंस के 28 मुकदमें दर्ज हैं। महज छठी क्लास तक पढ़ा महेन्द्र जैन बहुत ही शातिर बदमाश है। धोखाधड़ी के मामलों से इसने करोड़ों रुपए ऐंठ लिए। लग्जरी वाहनों का शौकीन महेन्द्र कई राजनेताओं का नजदीकी भी बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर अन्य वारदातों का पता लगाने के प्रयासों में जुटी हुई है।

 

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