डीएनपी में रहने वालों को मिलेगी थारपारकर, गायें और कैर सांगरी की होगी मार्केटिंग

Published Date 2017/04/26 13:15, Written by- FirstIndia Correspondent

जैसलमेर | जैसलमेर इस बार राज्य के बजट में सरकार जैसलमेर में डीएनपी पर ही मेहरबान दिखी। 10 करोड़ रुपए डीएनपी के लिए और 10.90 करोड़ आकल वुड फोसिल्स पार्क के लिए। डीएनपी को मिले 10 करोड़ को खर्च करने के लिए स्थानीय डीएनपी के अधिकारी ने बेहतरीन कार्ययोजना तैयार कर प्रस्ताव बनाए हैं। यदि ये प्रस्ताव पास हो जाते हैं तो डीएनपी आबादी का अब तक का सबसे बड़ा विकास होगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी। आगामी 27 अप्रैल को जयपुर में इस संबंध में बैठक होगी जिसमें ये प्रस्ताव रखे जाएंगे। डीएनपी में रहने वालों को अब थारपारकर गायें दी जाएगी। कैर सांगरी की मार्केटिंग की जायगी साथ ईको टूरिज्म के तहत होम स्टे का प्रस्ताव रखा गया है|

 


जानकारी के अनुसार डीएनपी में पशुपालकों के पास बड़ी संख्या में गायें है। किसी के पास 10 तो किसी के पास 25 गायें है। जबकि उनमें से अधिकांश गायें नोन प्रोडक्टिव है। इतनी गायों के बावजूद उन्हें रोजाना 10 से 15 किलो दूध ही मिलता है। ऐसे में अब डीएनपी नोन प्रोडक्टिव गायों को गांव वालों से खरीदकर गौशालाओं में भिजवा देगा और उसके बदले में दो तीन अच्छी नस्ल की थारपारकर गायें देगा। जिससे उन्हें रोजाना 15 से 20 किलो दूध मिल जाएगा।  साथ ही फिलहाल डीएनपी क्षेत्र व आसपास के क्षेत्रों में चारागाह सिमट चुके हैं। पहले डीएनपी इस इलाके में थारपारकर नस्ल की गाये देगा और बाद में धीरे धीरे चारागाह विकसित किए जाएंगे ताकि कम पशुओं के लिए बेहतर चारा उपलब्ध हो सके।

 


जैसलमेर जिले के डीएनपी इलाके में होने वाले कैर सांगरी अब दूर दराज के राज्यों में बड़े स्तर पर बेचे जाएंगे। डीएनपी में अब इनकी मार्केटिंग करने की योजना बनाई है। जिसके चलते डीएनपी की आबादी से विभाग कलेक्शन करेगा। कलेक्शन के बाद कैर सांगरी की बड़े स्तर पर मार्केटिंग की जाएगी और अच्छे भावों में बेचा जाएगा। जानकारी के अनुसार डीएनपी एरिय में हजारों की संख्या में कैर सांगरी के झाड़ लगे हुए हैं।

 


फिलहाल गांवों में पशुपालक घर पर ही घी बनाते हैं, हालांकि वे खुद के उपयोग के लिए ही बनाते हैं। बताया जाता है कि पोस्टिक सेवण घास खाने वाली गायों से मिलने वाले दूध का घी सबसे बेहतर होता है। डीएनपी इस और भी पहल करने को प्रयासरत है। ग्रामीण पशुपालकों से इस तरह का घी बनाकर उसकी भी मार्केटिंग डीएनपी द्वारा करवाई जाएगी।

 

 
इस प्रस्ताव के तहत ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने का भी प्लान है। डीएनपी अपने इलाके में ग्रामीणों को होम स्टे शुरू करने के लिए प्रेरित करेगी। डीएनपी आबादी अपने घर के आसपास छोटे छोटे हट्स बनाकर सैलानियों को ठहरा सकेंगे। सैलानियों को घर की तरह ही ठहराना होगा और उन्हें खाना भी घर पर बनाकर खिलाना होगा। इस योजना से डीएनपी आबादी को अपने घर में ही आजीविका का साधन मिल जाएगा।

 


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