पोकरण परमाणु परीक्षण की 20 वीं वर्षगांठ आज,पूर्व राष्ट्रपति स्व. अब्दुल कलाम थे मुख्य हीरो

Published Date 2017/05/11 11:03, Written by- FirstIndia Correspondent

जैसलमेर (पोकरण) | भारत सरकार द्वारा 1998 में खेतोलाई गांव के पास पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज खेतोलाई गांव के पास में किए गए परमाणु परीक्षण के बाद विश्व पटल पर खेतोलाई गांव का नाम होने से इन दिनों खेतोलाई गांव के ग्रामीण अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। परमाणु परीक्षण की 20 वीं वर्षगांठ आज है सरपंच नाथूराम बिश्नोई ने केन्द्र सरकार से खेतोलाई गांव को गोद लेने की मांग की। 11 मई 1998 के परमाणु परीक्षण के असली हीरो पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय एपीजे अब्दुल कलाम रहे कई महीनों तक भीषण गर्मी में खेतोलाई गांव में घूमते रहे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने परमाणु परीक्षण सफल होने के बाद कहां था " भारत में बुद्ध मुस्काराएं "।

 


परमाणु धमाकों को सहन कर चुका खेतोलाई गांव में हाल ही में शिक्षा के स्तर में काफी सुधार आया है। वहीं ग्रामीणों में आई बालिका शिक्षा के प्रति जागरुकता के चलते शत प्रतिशत बालिका शिक्षा का प्रचार हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में वर्ष 1951-52 में ही आठवीं तक की स्कूल खोली गई थी। वहीं हाल ही में खेतोलाई में 12वीं तक बालिका विद्यालय खोला गया है। बालिकाओं के उच्च शिक्षा स्तर के कारण कुल 18 महिलाएं सरकारी नौकरी में है। वहीं खेतोलाई गांव की ही शिक्षित महिला सुषमा विश्नोई द्वारा पोकरण क्षेत्र में इंडेन गैस एजेंसी संचालित कर कुशल ग्रहणी के साथ साथ कुशल व्यापारी का भी परिचय दिया जा है। युवा नेता रमेश टावरी ने केन्द्र व राज्य सरकार ने पोकरण में प्रत्येक परमाणु परीक्षण की वर्षगांठ मनाई जाए व पोकरण में वार म्यूजियम बनाया जाए ताकि युगों युगों तक यादे ताजा बनी रही।

 


गांव के निवासी मांगीलाल विश्नोई अज्ञात ने परमाणु परीक्षण के पलों को साझा करते हुए बताया कि वह 11 मई को अपने मकान की ओर जा रहे थे। तभी सेना के जवानों ने उन्हें घर जाने से रोका तथा गांव के सभी लोगों को अपनी कीमती सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाने की सलाह दी। थोड़ी ही देर में गांव के सभी लोग अपना कीमती सामान लेकर सेना के बताए सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए। देखते ही देखते पूरा गांव खाली हो गया। वहीं थोडी ही देर में जमीन में हल्का कंपन होना शुरू हुआ जो कि धीरे धीरे बढ़ता गया। ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे जमीन पूरी तरह से हिल गई है। जैसे ही जमीन थर्राई वैसे ही छत से धूल गिरने लगी। वहीं थोड़ी ही देर में परमाणु बम के सफल परीक्षण की घोषणा की।

 


गांव के सरपंच नाथूराम विश्नोई ने बताया कि सेना के जवानों ने परमाणु परीक्षण वाले दिन किसी को भी कानों कान खबर नहीं होने दी। थोड़ी ही देर में गांव को खाली करवा दिया गया। वहीं 11 मई की दोपहर को भूकंप की तरह जमीन हिली तथा आसमान में गुबार देखने को मिला। धमाके से हुए कंपनी से गांव के कई घरों में दरारें भी आ गई थी। उन्होंने बताया कि धमाके के काफी देर बाद तक भी रेत का गुबार शांत नहीं हुआ था तथा काफी देर बाद लोग अपने घरों की ओर जा पाए।   

 


गांव के ही निवासी दिनेश विश्नोई ने बताया कि गांव में 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद ग्रामीणों में रेडियेशन का असर देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि गांव में 1998 के बाद कैंसर धडल्ले से फैला है। इसके कारण ही गांव में 1998 के बाद गांव में कुल 8 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है और 15 व्यक्ति आज भी कैंसर का उपचार करवा रहे हैं। इसके साथ ही हाल ही में 12 वर्षीय बालक की भी कैंसर से मौत हो गई। लेकिन अभी तक सरकार द्वारा इस संबंध में कोई सर्वे कार्य नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पशुओं में भी रेडियेशन का असर देखने को मिल रहा है। जिसके कारण गांव में पशुओं में अंधे, विकलांग, विकृत के साथ साथ तरह तरह की बीमारियां सामने आ रही है।

 


परमाणु धमाकों को सहन करने वाला खेतोलाई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव में आज भी डामरीकृत सड़कों के स्थान पर ग्रेवल सड़क है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए जमीन आरक्षित की गई लेकिन भवन नहीं है। इसके साथ ही खेतोलाई गांव में पानी की 5 जीएलआर बनी हुई है। लेकिन इनमें भी पानी की अनियमितता होने के कारण यह जीएलआर खाली रहती है। जिसके कारण लोगों को एक हजार रुपए देकर पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। गांव की चौपाल पर बैठे बुजूर्गों को आज भी परमाणु परीक्षण के वह लम्हे पूरी तरह से याद है।

 


ग्रामीणों ने बताया कि परमाणु धमाके के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी खेतोलाई आए थे। उस दौरान उन्होंने धमाके वाले स्थल को बुथ स्थल का नाम दिया था। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने सभा का आयोजन किया जहां उन्होंने जय जवान जय किशन जय विज्ञान का नारा दिया था। ग्रामीणों ने उस दौरान सैन्य बल द्वारा की गई कार्रवाई तथा धमाकों के बाद हुए हालात के बारे में भी जानकारी दी।

 

We remain grateful to our scientists & the then political leadership for the courage shown in Pokhran in 1998. https://t.co/l2QMStppQ1

— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2017


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