The Department itself is spoiling the roadways buses equation

विभाग खुद बिगाड़ रहा है रोडवेज बसों का समीकरण

Published Date-07-May-2017 06:13:24 PM,Updated Date-07-May-2017, Written by- FirstIndia Correspondent

जैसलमेर | जैसलमेर का रोड़वेज डिपों पहले से ही लोड फेक्टर की कमी का शिकार होने के बावजूद उच्चाधिकारियों द्वारा इस डिपों में नियमों के खिलाफ 20 अनुबंधित बसों का संचालन करवाया जा रहा है। गौरतलब है कि जैसलमेर डिपों में 35 रूट में 30 बसों का संचालन किया जाता है। इन 30 बसों में से 20 बसे अनुबंध पर चल रही है। नियमों की अगर बात की जाए तो रोड़वेज डिपों में 30 प्रतिशत अनुबंधित बसों व 70 प्रतिशत निगम की बसों काे चलाने का प्रावधान है। लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा ही नियमों की अवहेलना कर बसों का संचालन करवाया जा रहा है। जिससे रोड़वेज डिपों को कम आय प्राप्त हो रहा है साथ ही निगम की बसाें को खड़ी करने से रोड़वेज के कर्मचारियों में भी जबरदस्त रोष व्याप्त हो गया है।

 


हाल ही में रोड़वेज को 20 नई बसों का आवंटन हुआ है। जिसमें से 5 बसे अनुबंधित है लेकिन अधिकारियों की मनमानी के चलते 5 अनुबंधित बसों को तो पुराने रूट पर शुरु किया जा चुका है जबकि निगम की बसों का रूट अभी तक शुरु नहीं किया गया है।रोड़वेज की पहले चलने वाले रूट में 15 अनुबंधित बसों का संचालन करवाया जा रहा था। उसके बाद आवंटित नई बसों में से 5 बसों को और अनुबंध पर चलाया जा रहा है। जिससे अब रोड़वेज की 20 बसें अनुबंध के तहत संचालित हो रही है।

 


रोड़वेज के नियमों के अनुसार डिपो के कुल रूट में से 30 प्रतिशत रूट पर ही अनुबंधित बसों का संचालन किया जाना है। इस हिसाब से जैसलमेर में 35 रूट पर 10 अनुबंधित बसों का ही संचालन किया जाना है जबकि जैसलमेर में 30 में से 20 अनुबंधित बसों का संचालन किया जा रहा है।  रोड़वेज में कार्यरत कर्मचारियों ने विभाग के उच्चाधिकारियों पर आरोप भी लगाए है कि अधिकारियों द्वारा अपनी मनमानी के चलते डिपों का निजीकरण किया जा रहा है।

 


कर्मचारियों ने आरोप लगाए है कि जब निगम की बसों को चलाया ही नहीं जा रहा है तो लोड फेक्टर में बढ़ोतरी व निगम को आय ही नहीं हो रही है। जिससे इस डिपों को घाटे में बताकर इसे बंद करने की नीति अपनाई जा रही है। कर्मचारियों ने आरोप लगाए है कि रोड़वेज के तहत अनुबंधित बसों को डीजल भरवाने के बाद 6 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान भी किया जाता है। निगम की बसों की संख्या कम कर तथा अनुबंधित बसों को अधिक चलाकर डिपों को घाटे में भी बताया जा रहा है। जिससे डिपों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होती जा रही है।

 


साथ ही सरकार द्वारा इसे घाटे का सौदा मानकर बंद करने की कार्रवाई भी शुरु की जा चुकी है। जानकारों के मुताबिक सरकार द्वारा डिपों को बंद करने की कार्रवाई की जाती है तो जैसलमेर के लोगों को इसका बहुत बड़ा नुकसान होगा। साथ ही यह निजी बस संचालकों की मनमानी भी बढ़ जाएगी। साथ ही साथ एक तरफ सरकार अपनी योजनाओं से आमजन को लाभांवित करने का प्रयास कर रही है वहीं दूसरी ओर डिपो को बंद करने की कार्रवाई से लोगों की परेशानियां भी बढ़ जाएगी।

 


रोडवेज कर्मियों का कहना है की उच्चाधिकारियों द्वारा जैसलमेर रोड़वेज को 5 नई अनुबंधित बसें आवंटित की गई है। जैसलमेर में पहले से 15 अनुबंधित बसों का संचालन हो रहा है। उसके बाद 5 और नई बसों से अब 20 अनुबंधित बसें चलेगी। जबकि सरकार के ही आदेश है कि 30 प्रतिशत से ज्यादा अनुबंधित बसों का संचालन नहीं किया जाएगा। जैसलमेर में पहले से लोड फेक्टर कम है। उसके उपर से अब निगम की बसों का खड़ा किया जा रहा है। जब आय ही नहीं होगी तो डिपों को तो घाटा ही होगा।

 


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