आर्मी के जवान का सिक्कों और चैस बोर्ड का अनूठा संग्रह, मुगलकाल से लेकर अब तक है सिक्के

Published Date 2017/04/24 14:03, Written by- FirstIndia Correspondent

जैसलमेर | हर व्यक्ति का अपना एक अलग शौक होता है। उस शौक को पूरा करने के लिए व्यक्ति को समय देने के साथ विभिन्न परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इसी शौक को पूरा करने के लिए जैसलमेर के सोनू गांव के 36 साल के प्रेमसिंह पिछले 30 साल से विभिन्न सिक्कों का संग्रहण कर रहे है। सिक्कों के संग्रहण करते करते आज प्रेमसिंह के पास विभिन्न सालों व विभिन्न जननेताओं के 200 से ज्यादा सिक्के है।

 


इसके साथ ही प्रेमसिंह को शतरंज बोर्ड इकट्ठे करने का भी शौक रहा है। इसी जुनून के चलते प्रेमसिंह के पास 30 से ज्यादा चैस बोर्ड भी जमा किए हुए है। प्रेमसिंह आर्मी में जवान है। अभी प्रेमसिंह राजपूत ट्रेनिंग सेंटर फरुखाबाद में कार्यरत है। देश भर में विभिन्न जगहों पर पोस्टिंग के दौरान प्रेमसिंह ने सिक्कों व चैस बोर्ड का संकलन किया है।

 


प्रेमसिंह ने बताया कि बचपन से उन्हें सिक्कों के प्रति अलग ही लगाव था। बचपन में मिलने वाली पॉकेट मनी में भी वे सिक्कों को खर्च नहीं करते थे। बचपन से सिक्कें इकट् ठे करते हुए उन्होंने सिक्कों में अलग अलग प्रकार के सिक्के इकट् ठे करना शुरु किया। दादी व नानी के पास भी पड़े सिक्के प्रेमसिंह ने इकट् ठे किए।  प्रेमसिंह के पास सिक्कों के संग्रहण में उनके पास सबसे पुराना सिक्का मुगल कालीन सिक्का है।

 

इसके साथ ही 1934 से लेकर आज तक के कई सिक्कों का संग्रहण है। जिसमें पुराने चलने वाले आना में चौथाई आना, 1 अाना, 2 अाना, 1 पैसा, 2 पैसा, 3 पैसा, 5 पैसा, 10 पैसा, 20 पैसा, 25 पैसा, 50 पैसा, 1 रुपए, 2 रुपए, 5 रुपए व 10 रुपए के सिक्के है। विभिन्न सिक्कों में जवाहरलाल नेहरु, इंदिरा गांधी, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, राजीव गांधी, डॉ भीमराव अंबेडकर, मदर टेरेसा, रविंद्रनाथ टेगौर, अब्दुल कलाम आजाद, वीर शिवाजी, लूई ब्रेल व दादा नौरोज के अंकन वाले सिक्के भी संग्रहण में शामिल है। इसके साथ ही उनके पास सिक्कों से बनी घड़ी भी है।

 


आर्मी के जवान प्रेमसिंह के पास करीब 30 चैस बोर्ड भी संकलित है। उन्होंने बताया कि उनके पास हर प्रकार के चैस बोर्ड है। जिसमें संगमरमर, पीतल, कांस्य, लकड़ी, प्लास्टिक, कागज के कई बोर्ड शामिल है। इसके साथ ही प्रेमसिंह ने शतरंज की कई किताबों का भी संग्रहण किया है। उनके पास 70 से ज्यादा शतरंज की किताबे है।

 

प्रेमसिंह की जहां भी पोस्टिंग हुई वे वहां अपने काम के साथ वहां अपना शौक भी पूरा करते रहे। उन्होंने बताया कि सिक्कों व शतरंज बोर्ड के कलेक्शन के लिए उन्होंने कई जिलों में घुमे कई लोगाें से मिन्नते की तथा कई लोगों को इनके लिए उनकी मांग के अनुरुप राशि भी वहन की।

 


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