arbitrary of private schools starts with new education session

नया सत्र शुरू होने के साथ ही अभिभावकों की जेब पर डाका डालने का सिलसिला शुरू

Published Date-03-Apr-2017 03:35:41 PM,Updated Date-03-Apr-2017, Written by- FirstIndia Correspondent

झालावाड़। शिक्षा का नया सत्र शुरू होने के साथ ही अभिभावकों की जेब पर डाका डालने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से उनके बच्चों को निजी स्कूलों की ओर से दी जाने वाली पाठ्य सामग्री, स्कूल ड्रेस एवं अन्य चीजों के लिए मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। ऐसे में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए अभिभावकों को मजबूरन भारी भरकम राशि अदा करनी पड़ रही है। पाठ्यक्रम की किताबों में तीन गुना तक दाम वसूले जा रहे हैं, वहीं किताबों और यूनिफाॅर्म की खरीद पर कोई नियम कायदे दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में निजी स्कूल संचालक जमकर चांदी कूट रहे हैं।


एनसीईआरटी यानि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एंव परिक्षण परिषद का कक्षा 1 से 12वीं तक का सेट 2 हजार में मिल रहा है, लेकिन निजी प्रकाशक का सेट 7 से लेकर 10 हजार रुपए तक मिल रहा है। शिक्षा नगरी में ज्यादातर स्कूलों ने अपने ही स्तर पर प्रकाशक तय कर रखे हैं। ऐसे में अभिभावकों के लिए अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना भारी पड़ता हुआ नजर आने लगा है। वहीं स्कूली बच्चों के लिए भारी भरकम स्कूल बेग जान पर बोझ के समान बनते जा रहे हैं।


इस मामले को लेकर जब हम शहर की दुकानों पर गये, जहां कुछ बच्चे किताबें खरीद रहे थे। यहां पर कक्षा 6 की कुछ किताबें 430 रुपए की थीं, जो केंद्रीय विद्यालय की थी। वहीं कुछ किताबें 325 रुपए की थी। वहीं कक्षा 7 की कुछ किताबें 1500 रुपए की मिल रही है। इस फर्क की वजह है प्राइवेट स्कूलों को किताबों की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन के कारण। ऐसे में अभिभावकों को मजबूरी में इन्हें मनमाने दाम चुका कर खरीदना पड़ रहा है।


इस बारे में जब कुछ महिलाओं से बात की, तो वे हालांकि खुलकर तो नहीं बोलीं, मगर उन्होंने बच्चों के खातिर सब करने की मजबूरी बताया। वहीं दुकानदार उस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि यह सब कमीशन का खेल है। हालांकि दुकानदार ने पूरी तरह से खुलकर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन अतना जरूर कहा कि 20 से 30% का कमीशन तो चलता है।


कमीशन के इस खेल का खमियाजा किसे भुगतना पड़ रहा है, ये आप सभी अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन जहां शिक्षा का ही व्यापारीकरण होने लगे तो फिर इसका अंदाजा भलीभांती लगाया जा सकता है कि शिक्षा के ऐसे मंदिरों में पढ़ने वाले बच्चों को किस तरह ​की शिक्षा दी जाएगी और उन बच्चों को क्या भारतीय संस्कार सिखाए जाना मुमकिन है।

 

Jhalawar Rajasthan Private School Books NCERT Education Department Rajasthan News

Recommendation