अश्व गंधा की खेती से किसान मालामाल, दवा कंपनियों से सीधे करते है मोल-भाव

Published Date 2017/05/03 10:51, Written by- FirstIndia Correspondent

झालावाड़ |  झालावाड जिले में अब किसानों के लिए अश्वगंधा  की खेती लाभ देने वाली फसल हो गई है| इससे ना केवल किसान की माली हालत सुधरी है बल्कि साथ ही उनके पास लाखों लाखों रुपए भी बचत के रूप में आने लगे हैं| यह वह फसल है जिनका कोई सानी नही| साल में 1 बार यह फसल आती है और किसानों के चहेरे पर खुशियां बिखेर जाती है| इसकी खेती में किसानों का अधिक मुनाफा है| ना चोरी का डर ना मौसम की मार का और ना जानवरों को खाने का डर| एक बार बीज उगाने के बाद फसल आना है|

 

झालावाड़ जिले में अश्वगंधा की खेती पक कर तैयार हो गई है| किसान अब अश्वगंधा के जड़े को लेकर बेचने की तैयारी में है| अश्वगंधा की खेती झालावाड जिले के झालावाड के आसपास क्षेत्र में होती है| इसकी कीमत 14000 रु से 16000 रु चल रही है| यही फसल सूखने के बाद 25 से 30 हजार रु क्विंटल तक बिक जाती है, मगर यह झालावाड जीले में नही बिकती है| नीमच एमपी मंडी में किसानों को जाना पड़ता है जो किसानों को महंगा सौदा होता है|

 

अश्व गंधा की खेती से किसान काफी खुश है| यह जड़ के रूप में उगती है और जड़ो को 3 तरह से बेचा जाता है| सबका भाव अलग-अलग है| अब तो दवा कम्पनियां यहां किसनो से सम्पर्क करके अश्व गंधा को ले जाती है और फिल्टर करके पाउडर के रूप में दवा के रूप में बेचती है| इसके कई फायदे है, शक्ति वर्धक, सेक्स वर्धक के साथ साथ साथ यह कई बीमारियों में काम आती है|

 


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