God tells to write the date of marriage in jhalawar s this village

यहां भगवान कागज लिखकर बताते है शादी की तारीख, शादी की पूरी जिम्मेदारी भी लेते है खुद

Published Date-13-May-2017 12:30:05 PM,Updated Date-13-May-2017, Written by- FirstIndia Correspondent

झालावाड़ | क्या कभी आपने सुना है कि एक सादे कागज पर भगवान के यहां से तारीख लिखकर दे दी जाती है और उसी दिन लोगों के घर में शादी की सभी रस्मे कुशल पूर्वक सम्पन्न हो जाती है और शादी होने के बाद दूल्हा दुल्हन को वापस उसी कागज यानी पाती को लेकर भगवान के दर पर आना पड़ता है और पाती को यहां रखना पड़ता है भगवान से उनको आशीर्वाद लेना पड़ता है| यह हम नहीं कह रहे बल्कि लोगो को भगवान बालाजी पर यह आस्ता और विश्वास है| यही कारण है कि यहां से सैंकड़ो लोग यहां से पाती ले जाते है और कुशल पूर्वक शादियों सम्प्पन करते है क्यों कि सारी शादी की जिमेदारी खुद भगवान की होती है|

 


ऐसा ही नजारा हमें देखने को मिला झालावाड़ के सीमावर्ती पिपलिया के बालाजी मंदिर पर जहां दिन भर में मंदिर परिसर में पंडित द्वारा एक सादे कागज पर वर-वधु का नाम लिखकर तारीख लिख दी जाती है, उस कागज को पाती कहते हैं| उस पाती को भगवान के सामने रखकर उसमें धागा बांधकर भगवान के चरणों में रख दिया जाता है फिर उसको वर-वधू के परिवार लोगों को दे दी जाती है| शादी का मुहूर्त लेकर वर-वधू वाले अपने बच्चे बच्चों की शादी कर देते हैं और शादी की सारी जिम्मेदारी संभालते हैं| भगवान बालाजी हनुमान जी और शादी संपूर्ण होने के बाद वर वधु यहां पर उसी पाती  कागज को लेकर भगवान का आशीर्वाद लेने भी पहुंचते हैं और वापस पाती को भगवान के चरणों में रखते है और आशीर्वाद लेते है तब सम्पूर्ण कार्य सम्पन्न होता है|

 


झालावाड और MP के सीमावर्ती इलाके में पिपलिया बालाजी हनुमान जी मंदिर का मंदिर है जो कि पीपलिया क्षेत्र में आता है| यहां इस मंदिर में दिनभर में सैकड़ों लोग अपने बच्चे बच्चे की शादी के सपने लेकर यहां पहुंचते हैं| यहां किसी का महूर्त नहीं देखा जाता ना कुंडली मिलाई जाती है| बस भगवान का आशीर्वाद के रूप में एक सादा कागज पर तारीख दे दी जाती है, वही होता है| भगवान का आशीर्वाद वही होता है| शुभ मुहूर्त उस दिन होती है| शादी और सारी जिम्मेदारी होती है भगवान की| भगवान ही शादी को संपन्न करवाता है और अच्छे से शादी होने के बाद वर वधु मंदिर में आशीर्वाद देने पहुंचते हैं और उसी पाती को वापस भगवान के यहां जमा कराते हैं|

 


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