Jodhpur high court give justice after 40 years

हाईकोर्ट ने 40 साल बाद दिलाया इन्साफ, मिलेगा पुश्तेनी जमीन का हक

Published Date-11-Dec-2016 05:11:38 PM,Updated Date-11-Dec-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

जोधपुर | राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायधीश गोविंद माथुर व न्यायधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने रेवेन्यू मामलों से संबंधित एक 40 वर्ष पुराने मामले में शुक्रवार को अहम निर्णय करते हुए बाडमेर जिलांतर्गत लाखेटी गांव निवासी 71 वर्षीय सुलेमान को इन्साफ दिलाया। खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि अपीलकर्ता के पाकिस्तान जाने का कोई सबूत नहीं है। और देश के ही किसी अन्य भाग में जाने पर किसी की जमीन को टीनेंसी एक्ट के तहत जब्त नहीं किया जा सकता।

 

खंडपीठ ने इस संबंध में बाडमेर के तत्कालीन तहसीलदार, एसडीएम व रेवेन्यू बोर्ड अजमेर के आदेशों सहित एकल पीठ के 18 जनवरी 2016 के निर्णय को भी निरस्त कर दिया। वहीं रेवेन्यू अपीलेट अथॉरिटी बाड़मेर की ओर से 26 सितंबर 2012 को अपीलकर्ता के पक्ष में जारी आदेश को बहाल कर दिया। मामले के अनुसार अपीलकर्ता वर्ष 1975 में रोजी रोटी कमाने गंगानगर गया था। लेकिन तत्कालीन पटवारी ने उसके अनाधिकृत तरीके से पाकिस्तान चले जाने का आरोप लगाते हुए उसकी साढे चौबीस बीघा पुश्तेनी जमीन को राजस्थान टीनेंसी एक्ट 1955 के प्रावधानों के तहत सरकार के नाम से ट्रांसफर करने की सिफारिश कर दी थी।

 

इस बाबत तहसीलदार ने भी आदेश जारी कर दिया तथा एसडीएम बाडमेर ने अपीलकर्ता की अनुपस्थिति में 2 अगस्त 1975 को एकतरफा आदेश जारी कर डिग्री पारित कर दी। इसके खिलाफ अपीलकर्ता ने जिला कलेक्टरी में अपील दायर की, लेकिन उसे 19 अप्रैल 1989 को खारिज कर दिया गया। बहरहाल रेवेन्यू अपीलेट अथॉरिटी ने अपील स्वीकार की, लेकिन इसे तहसीलदार ने नहीं माना। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में भी रिट याचिका दायर की, लेकिन लंबी सुनवाई के बाद एकलपीठ ने 18 जनवरी 2016 को रिट खारिज कर दी। इसे खंडपीठ में अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। अपीलकर्ता की ओर से महावीर पारीक ने व सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता ओपी बूब ने पैरवी की।

 

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