जेल रिमेशन में राज्य रिमेशन नहीं जोड़ा जाएगा: हाईकोर्ट

Published Date 2016/12/22 17:05, Written by- FirstIndia Correspondent

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर गृह सचिव व जेल महानिदेशक के खिलाफ दायर अवमानना याचिका एवं स्थाई पैरोल याचिका को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। जस्टिस गोविन्द माथुर व जस्टिस दीपक माहेश्वरी की खंडपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए निर्देश दिए है कि जेल रिमेशन में राज्य रिमेशन नहीं जोड़ा जाएगा।


गौरतलब है कि कैदी बन्ने सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट में स्थाई पैरोल के साथ समय पहले रिहाई के लिए याचिका दायर की गई थी। राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जेल नियमों को लेकर एक कमेठी भी बनाई गई थी, जिसने सुझाव दिए थे जो कि केबिनेट स्तर पर रखे गए हैं, लेकिन अभी मंजूरी नही मिली है। इसी दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर गृह सचिव व जेल महानिदेशक के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर कर ली।


सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवकुमार व्यास ने बताया कि कैदी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। जबकि कोर्ट से उसे तीन साल चार माह व अठारह दिन का जेल रिमेशन मिला हुआ है जबकि राज्य सरकार की ओर से दो साल का रिमेशन दिया गया है। कैदी ने अभी तक रिमेशन पूरा नही किया है। 


राज्य सरकार की ओर से कैदी के प्रकरण में परीक्षण किया था जिसमें पाया कि राजस्थान प्रिजनर्स नियम 2006 के नियम 8-2 के अर्न्तगत बंदी चार वर्ष का परिहार अर्जित नही कर पाया जिसकी वजह से समयपूर्व रिहाई की पात्रता नही रखता है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अवमानना याचिका व पैरोल याचिका को खारिज कर दिया।

 

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