decision will comes on bail of former Congress MLA

कांग्रेस के पूर्व विधायक की जमानत पर 27 को आएगा फैसला

Published Date-25-Jan-2017 06:34:33 PM,Updated Date-25-Jan-2017, Written by- FirstIndia Correspondent

जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय घोटाला मामले के छह आरोपियों की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में पेश जमानत याचिका पर आज सुनवाई पूरी होने के साथ फैसला 27 जनवरी तक सुरक्षित रखा गया है। जस्टिस पीके लोहरा की अदालत में सरकार की ओर से अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता शिवकुमार व्यास व सहयोगी विक्रमसिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखा। वहीं एसीबी अधीक्षक अजयपाल लाम्बा भी कोर्ट में मौजूद रहे।


आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोडा, अधिवक्ता धीरेन्द्र सिंह, सुनील जोशी, विनोद शर्मा व गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने पक्ष रहा। करीब दो घंटे तक दोनों पक्षों की ओर से बहस की गई, उसके बाद कोर्ट ने 27 जनवरी तक फैसला सुरक्षित रखा है। गौरतलब है कि इस मामले के छह आरोपी पूर्व विधायक जुगल काबरा, डूंगरसिंह, श्याम सुन्दर शर्मा, दरियाव सिंह और केशवन और बाद में गिरफ्तार किये गये साक्षात्कार बोर्ड के सदस्य पीएस चूंडावत की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिकाए पेश की गई है।


पूर्व में पाच आरोपियों की ही जमानत याचिकाएं थी, लेकिन आज विशेष अनुमति के साथ साक्षात्कार बोर्ड के सदस्य पीएस चूंडावत की ओर भी जमानत याचिका को साथ ही सुनवाई के लिए रखवाया गया था। अतिरिक्त महाधिवक्ता व्यास ने सरकार की ओर से बताया कि संवेधानिक अधिकारों का हनन करते हुए अनपढ़ों को भी जेएनवीयू ने व्याख्याता बना दिया है और यह सब राजनीति के चलते किया गया है। देश के होनहार बच्चे जो योग्य होते हुए भी चयनित नहीं हो पाये, जबकि षडयंत्रपूर्वक अनपढ़ चहेतों को भी चयनित किया गया है। इससे होनहारों के भविष्य के साथ कुठाराघात किया गया है।


यह सोच भी नहीं सकते कि विश्वविद्यालय के विद्वान गुरूजन ऐसा कृत्य करेंगे और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ खुलेआम कर दिया गया। सरकार को भी इन लोगों ने मुश्किल में डाल दिया है। जेल के अन्दर होने के बावजूद गवाहों को धमकाने का आरोप लगाते हुए सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि जेल में रहते सब कुछ कर रहे हैं, तो बाहर आने पर क्या कुछ नही करेंगे।


सुप्रीम कोर्ट ने भी पूर्व कुलपति को जमानत दी है, लेकिन कई शर्तों के साथ। क्योकि अभी इस मामले में 64 अन्य आरोपी हैं, जिनके लिए एसीबी प्रयास कर रही है। सरकार की ओर से पूर्व में हुए कुछ घोटाले जैसे की बिहार फोड स्केम व ओमप्रकाश चोटाला कांड को लेकर नजीरें भी पेश की है और जमानत देने का विरोध किया है। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद जस्टिस लोहरा की अदालत ने 27 जनवरी तक फैसला सुरक्षित रखा है।

 

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