अडाणी-अम्बानी को नहीं, किसान के बेटे को मिलना चाहिए बिजली की स्वतंत्रता का हक : तिवाड़ी

Published Date 2016/12/23 21:52, Written by- FirstIndia Correspondent

नागौर। दीनदयाल वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि, 'मैं ये दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर चौधरी चरणसिंह नहीं होते तो जमीन का मालिक न जाट होता न राजपूत होता और न ही कोई ओर होता। अपने प्रधानमंत्रित्व के एक महिने से भी कम समय में उन्होंने किसानों को नाबार्ड दिया।' उन्होंने कहा कि 'अगर सरदार पटेल, दीनदयाल उपाध्याय और चौधरी चरणसिंह के चिंतन को मानते तो आज देश की दशा कुछ ओर ही होती।' ​तिवाड़ी ने लाडनूं में चौधरी चरणसिंह विचार मंच द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह की 114वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए ये बात कही।


घनश्याम तिवाड़ी ने स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन बिल (एसआईआर) की बात करते हुए कहा कि इस बिल के अनुसार इस कानून को लागू करने के बाद न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। एक लकीर खींचते ही पंचायत, नगर पालिका का अधिकार खत्म हो जायेगा। उन्होंने कहा कि जो जमीन चौधरी चरणसिंह ने अपने समय में बचाई थी, वह अब मुश्किल में है। भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन के लिए विधानसभा में आया तो मैंने अकेले ने उसका विरोध किया। लोगों ने कहा कि मैं पार्टी का विरोध कर रहा हूं। तब मैंने कहा कि मैं पार्टी का विरोध नहीं कर रहा हूं मैं किसानों के हित की बात कर रहा हूं। 


तिवाड़ी ने विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हाल ही भारत विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बना, परंतु भारतीय 182वें नंबर पर हैं। इसका अर्थ साफ है कि हमारी कुल संपदा का 58 प्रतिशत देश के केवल 1 प्रतिशत लोगों के पास है। वहीं 68 प्रतिशत किसानों के पास केवल 8.5 प्रतिशत संपदा हैं। ये संपत्ति का विभाजन है, इसलिये चौधरी चरणसिंह की जयंती पर हमें आर्थिक न्याय के लिये लड़ने की प्रतिज्ञा करनी होगी।


नागौर की धरती से कॉरपोरेट जागीरदारी के खिलाफ लड़ाई का शंखनाद :
तिवाड़ी ने कहा आर्थिक न्याय और सामाजिक समरसता की लड़ाई पिछले एक साल से लड़ रहा हूं और इस एक साल में मैंने 1 लाख किलोमीटर की यात्रा कर 25 जिलों में इन विषयों को रखा है। उन्होंने कहा कि अगर हमने आर्थिक न्याय की लड़ाई नहीं लड़ी तो जागीरदारी जो समाप्त तो हो गई, परंतु पारिवारिक सामंतवाद आयेगा और कॉरपोरेट जागीरदारी हमको लील जायेगी। इसलिये हम सबको एक साथ खड़ा होना पड़ेगा। नागौर वह धरती है, जहां से इस लड़ाई के लिये शंखनाद किया जा सकता है। तिवाड़ी ने कहा कि मैं समझता हूं कि आर्थिक न्याय, सामाजिक समरसता के लिये शंखनाद हम करेंगे तो हमारी जमीन भी बचेगी और संतत्ति का भविष्य भी बचेगा।


किसान के बेटे को मिलना चाहिए बिजली की स्वातंत्र्यता का हक :
बिजली के स्वातंत्र्य पर बोलते हुए तिवाड़ी ने कहा कि क्या आवश्यकता थी, जो प्रदेश सरकार ने 40 हजार मेगावॉट सोलर एनर्जी के लिये अडानी और अंबानी के साथ समझौता किया। जब 3 रुपये प्रति यूनिट पर बिजली मिल सकती है, तो 8 रुपये प्रति यूनिट पर बिजली पैदा करने का समझौता किस लिहाज से किसानों के हित में है। उन्होंने कहा कि मैं मांग करता हूं कि अडानी अंबानी से सौदा रद्द कर राजस्थान के किसानों के साथ उनके हित में यह सौदा किया जाना चाहिए। जब किसान के खेत में सोलर एनर्जी का प्लांट लगेगा, तो उसे उर्जा स्वातंत्र्य का अधिकार स्वत: मिलेगा। तिवाड़ी ने ​तीखे शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि बिजली की स्वातंत्रता का हक किसान के बेटे को मिलना चाहिए, क्योंकि साल के 300 दिन हमारे बाप दादाओं ने सूरज की धूप में अपनी पीठ को काली किया है और आज सोलर एनर्जी का लाभ उनके बेटे पौते न लेकर कोई बिजनेसमैन लेगा, तो ये ठीक नहीं है।

 

Nagaur Ladnu Rajasthan Ghanshyam Tiwari Sanganer MLA Farmers Deendayal Vahini

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