डेगाना में बोले सचिन पायलट, कहा — मुझे नहीं है सत्ता का मोह, छोटी सी उम्र में पार्टी ने दिया बहुत कुछ

Published Date 2016/11/29 21:45, Written by- FirstIndia Correspondent

नागौर। इन दिनों सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट और अशोक गहलोत में से कौन होगा, इसे लेकर अटकलों को दौर जारी है। इसी बीच आज नागौर जिले के डेगाना कस्बे में आयोजित किसान रैली में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने इस विवाद पर विराम लगाने के भी प्रयास किए हैं। पायलट ने कहा कि मुझे सत्ता का कोई मोह नहीं है, पार्टी ने मुझे छोटी सी उम्र में बहुत कुछ दे दिया है।


किसानों की भीड़ के बीच पायलट सहित सभी कांग्रेसी नेताओं ने राज्य सरकार की कार्यशैली व केंद्र की नोटबंदी पर भी जमकर प्रहार किए। पायलट ने वसुंधरा सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए घोटालों में लिप्त सरकार बताया है। उन्होंने कहा कि खान विभाग में 45,000 करोड़ का घोटाला किया था। हमारे धरने—प्रदर्शन आदि के कारण खानों की रेवडियां वापस ली थी। 

 

प्रदेश की मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपनी महत्त्वाकांक्षी योजना जल स्वावलम्बन को लेकर जनप्रतिनिधियों को बुलाया था, जिसमें अधिकांश मंत्री, विधायक व सांसदों की अनुपस्थिति से साबित हो गया है कि उक्त योजना कितनी खोखली है। उन्होंने कहा कि इस योजना का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जल स्वावलम्बन के नाम पर लोगों को भ्रमित कर चंदा वसूली की जा रही है। योजना के प्रति भाजपा के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता उसकी लचरता पर मुहर लगा रही है। 


उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि इस सरकार ने ढ़ाई साल के दौरान सिर्फ महलों के ताले लगाए और खोले हैं। वहीं नोटबंदी के फैसले को गरीबों पर कुठाराघात बताया है और उन्होंने कहा कि काला धन जिनके पास है, उन्हें तो पहले ही भगा दिया गया है। विजय माल्या व ललित मोदी भी इनमें से ही है। नोटबंदी के फैसले ने सबसे ज्यादा ग्रामीण आबादी पर विपरीत प्रभाव डाला है।

 

देश व प्रदेश में नोटबंदी के कारण जो हालात बने हैं, उसमें सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को पहुंचा है। बिना बैंकों की आधारभूत संरचना का निर्माण किये नोटबंदी की घोषणा ने गांवों व छोटे कस्बों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लोग न तो इस बदलाव को समझ पा रहे है और न ही उन्हें सरकार की तरफ से किसी प्रकार की मदद मिल पा रही है।


रैली में पूर्व मंत्री मास्टर भंवरलाल, नसीम अख्तर, मंजू मेघवाल, पूर्व सांसद गोपाल सिंह आदि कांग्रेस के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। डेगाना रैली में नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव जीते पालिका अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा सहित 14 पार्षदों ने फिर से कांग्रेस का दामन थाम लिया है।


इस रैली की एक खासियत यह रही कि कांग्रेस में अब तक घोर विरोधी रहे सभी नेता एक मंच पर नजर आए। चाहे वह पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा हो या पूर्व मंत्री हरेंद्र मिर्धा एक दूसरे के खिलाफ लोकसभा व विधानसभा चुनाव में आग उगलने वाले रिछपाल मिर्धा गुट व हरेंद्र मिर्धा गुट एकता में नजर आए। 


बहरहाल ऐसे में, यह एकता आगामी चुनाव में एक रह पाएगी या नहीं यह समय के गर्भ में है। वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों में पायलट के इस बयान को मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

 

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