issue of pastoral land to bodies and mines traders rise in assembly

विधानसभा में उठा चारागाह भूमि को निकायों और खान कारोबारियों को देने का कोई मामला

Published Date-17-Mar-2017 08:40:47 PM,Updated Date-17-Mar-2017, Written by- Lal Singh Fauzdar

जयपुर। चरागाह भूमि को निकायों और खान कारोबारियों को देने का कोई मामला सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। इस बारे में विधानसभा में शून्यकाल में विधायक हनुमान बेनीवाल के सवाल के जवाब में यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि नगरीय निकायों में शहरीकरण के चलते जमीन रूपांतरित करने की जरूरत है। इसी आधार पर 28 अक्टूबर 2016 को कलेक्टर्स को पत्र लिखा गया है।


चारागाह भूमि को निकायों और खान कारोबारियों को देने का मामला आज विधानसभा में विधायक हनुमान बेनीवाल ने उठाया। बेनीवाल ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि हजारों गायें मर रही हैं। हिंगोनिया गौशाला का मामला भी राष्ट्रीय मुद्दा बना था और अब चारागाह भूमि को रूपांतरित करने की बात कही जा रही है, जबकि अफसर और विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि चारागाह भूमि रूपांतरित नहीं हो सकती। ऐसे में खान जैसे बड़ा घोटाला हो सकता है।


इस पर यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि इस मामले में 8 दिसंबर 2010 को अधिसूचना जारी की गई थी। उन्होंने कहा कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 68 में प्रावधान है कि सारी सरकारी भूमि निकाय में दर्ज होगी। निकाय क्षेत्र में पशुओं को चरने के लिए छोड़ा नहीं जा सकता। मंत्री ने कहा कि निकाय क्षेत्र में शहरीकरण के कारण निकायों को जमीन मिलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 28 अक्टूबर 2016 को कलेक्टर्स को पत्र लिखा था, जिसमें चारागाह भूमि स्थानांतरण के आदेश दिए गए थे।


इसके बाद में बेनीवाल ने और बोलना चाहा, लेकिन उपाध्यक्ष राव राजेन्द्र सिंह ने कहा कि आपको जितना बोलना था, उससे ज्यादा बोल दिया। इस मामले में राजस्व राज्यमंत्री अमराराम ने कहा कि सरकारी भवनों के लिए जरूर कलेक्टर्स को भूमि सेट अपार्ट करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों, स्कूलों और रेल लाइन्स के लिए इस तरह की जमीन सेट अपार्ट की जाती हैं। 


मामले में संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि सिर्फ सीएस की बैठक में विचार होने का मतलब यह नहीं है कि निर्णय लिया गया है। बैठक में हुई बातों का कई स्तर पर परीक्षण होता है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। दरअसल मामले में यह चिंता जताई गई कि चारागाह भूमि को रूपांतरित किया गया तो पशुओं के लिए भूमि ही नहीं बचेगी। सरकार ने हालांकि यह साफ कर दिया कि जिस पत्र की बात कही जा रही है, वह अक्टूबर 2016 का लिखा है और सीएस की अध्यक्षता में बैठक भी तब ही हुई थी।

 

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