Special story on Somvati Amavasya

जानिए सोमवती अमावस्या से जुड़े रहस्य व इसकी पूजा के विधी-विधान

Published Date-27-Mar-2017 05:13:04 PM,Updated Date-27-Mar-2017, Written by- FirstIndia Correspondent

सोमवती अमावस्या धार्मिक द्ष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। सोमवार को आने के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहते है। सोमवार 27 मार्च 2017 सोमवार को सुबह 10:45 से मंगलवार 28 मार्च को सुबह 08:26 तक सोमवती अमावस्या है। इस अमावस्या की खास बात यह है कि यह वर्ष में एक अथवा दो बार ही पड़ती है।

 

इस पर्व में स्नान और दान को काफी महत्व दिया जाता है। इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन तथा उनकी 108 प्रदक्षिणा करने का विधान है। 108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती है। प्रदक्षिणा करते समय 108 फल पृथक रखे जाते हैं। बाद में वे भगवान का भजन करने वाले ब्राह्मणों या ब्राह्मणियों में वितरित कर दिये जाते हैं। ऐसा करने से संतान चिरंजीवी होती है। इस दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है।

 


सोमवती अमावस्या पूजन के लिए भी अलग विधी- विधान है इस विधी को जान के ही इस अमावस्या को सही तरह से मनाया जा सकता है। गौ चंदन या कण्डें को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर निम्न दिये गये देवताओं को 1-1 आहुति दें।

 

ॐ कुल देवताभ्यो नमः,ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः,ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः,ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः,ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः। इस पूजन से घर में जहां सुख शांति का वास होता है वही धर से दरिद्रता का नाश होता है। 

 

 

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