नोटबंदी के बाद 'पाप' के धन ने बनाया कई मंदिरों को अमीर

Published Date 2016/11/27 18:38, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। नोटबंदी ने भारतीय मंदिरों को काफी धनी बना दिया है, क्योंकि आठ नवंबर को सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए जाने के बाद हुंडी जमा और गलत तरीके से कमाई गई मुद्राओं में वृद्धि देखी गई है। ये नोट अभी में हुंडी में या दान बक्सों में रखे जा रहे हैं। केवल कुछ मंदिरों में सख्ती से लोगों को इन नोटों की पेशकश करने पर रोका जा रहा है। धार्मिक जगहों पर हुंडी जमा राशि में पिछले पखवाड़े से धनराशि में भारी इजाफा हुआ है। हालांकि इन धार्मिक जगहों को पुराने नोटों के स्वीकार करने के लिए छूट नहीं दी गई है।


वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने आईएएनएस से कहा कि मंदिरों में हुंडी के जरिए जमा की जाने वाली नकदी कर जांच के दायरे में नहीं होगी। एक अधिकारी ने कहा, "मंदिरों के लिए यह छूट है कि यदि राशि दान बक्से के जरिए आती है तो हम सवाल नहीं करेंगे। इस तरह की जमा राशि के लिए कोई सीमा नहीं है।" चैरिटेबल ट्रस्ट को मंदिरों के नियम बनाए रखने होंगे, हालांकि उन्हें सीधे दान देने वाले श्रद्धालुओं के लेनदेन का उचित रिकॉर्ड रखना होगा।


देश के सबसे धनी मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि टीटीडी इन नोटों को बैंक में जमा कर रहा है, क्योंकि सरकार पहले ही स्पष्ट कह चुकी है कि भक्तों द्वारा मंदिरों में जमा कराई राशि पर कर नहीं लगाया जाएगा। मंदिर के अधिकारी ने कहा, "नोटबंदी से पहले ही इस वित्त वर्ष में कुल राजस्व 2,600 करोड़ रुपये में से हुंडी संग्रह से करीब एक हजार करोड़ रुपये (14.6 करोड़ डॉलर) आने की उम्मीद थी। यह लक्ष्य नोटबंदी से पार होने की संभावना है।"


विजयवाड़ा के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में हुंडी दान में नोटबंदी से एक करोड़ रुपये से ज्यादा वृद्धि हुई है। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, मंदिर ने 2.89 करोड़ रुपये मौजूदा महीने में प्राप्त किए हैं, यह सामान्य संग्रह से पहले ही एक करोड़ रुपये ज्यादा है। इसमें एक हजार रुपये के 2,941 और 500 के 15,723 नोट शामिल हैं। भक्तों ने 2,000 रुपये के 48 नए नोट हुंडियों में डाले हैं।


चेन्नई के टीटीडी मंदिर में भी हुंडी प्रस्ताव में अचानक भारी वृद्धि देखी गई। एक अधिकारी ने कहा कि सामान्य हुंडी संग्रह हर महीने करीब एक करोड़ रुपये है, लेकिन नोटबंदी के बाद दानपात्रों में कई बंडल 500 और 1,000 रुपये के नोट के मिलने से यह संग्रह दो करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। मंदिर ने लोगों को नोटबंदी के नोटों को नहीं दान करने के लिए कोई नोटिस नहीं दिया है। कुछ बड़े मंदिरों ने भक्तों से कहा है कि वे पुराने नोट दान बक्सों में नहीं डालें।


इस्कान के राष्ट्रीय संचार निदेशक, वी. एन. दास ने कहा, "हम चैरिटेबल ट्रस्ट हैं, हम दस्तावेजी दान के लिए स्पष्ट तौर पर पुराने नोट नहीं ले रहे हैं। और किसी को भी दानपात्रों में पुराने नोट डालने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इसका कड़ाई से पालन किया जा रहा है। आठ नवंबर के बाद से हमने दान बक्सों को खोल दिया और वहां जो भी पुराने नोट थे, उन्हें जमा कर दिया है।"


स्वर्ण मंदिर सहित पंजाब के गुरुद्वारों के प्रबंधक, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को 10 नवंबर से स्वीकार करने से मना कर दिया है। अमृतसर में एजीपीसी के एक अधिकारी ने कहा, "हमने हरमंदिर साहिब के प्रभारी सहित सभी गुरुद्वारा प्रबंधकों को निर्देश दे दिया है कि पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को न स्वीकार किया जाए। कुछ भक्त अभी भी पुराने नोट गोलकों में रख रहे हैं। सेवादार पुराने नोटों को रखने से मना कर रहे हैं।"

 

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