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Auspicious ascendant and Full of worship with rituals of Maa laxmi on Diwali

दीपावली महापर्व पर पूजा के शुभ लग्न एवं मुहूर्त और सम्पूर्ण पूजा विधि

Published Date-29-Oct-2016 01:06:46 PM,Updated Date-29-Oct-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

दीपावली जैसा की हम सब जानते हैं कि यह दीपों का त्यौहार है| इस दिन दियों की रोशनी अमावस्या की काली अंधेरी रात को जगमगाने पर विवश कर देती है| यह त्यौहार हमें यह सीख देता है कि अगर प्रकृति हमारी जिंदगी में अंधेरा भी कर दे तो हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और अपनी मेहनत से अंधेरे को उजाले में बदलने का हौसला रखना चाहिए| ठीक उसी तरह जैसे अमावस्या की काली रात को दीप जलाकर रोशनी की जाती है| यह त्यौहार सत्य की असत्य पर विजय का भी प्रतीक है| इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष विधान है| इस दिन पूजा करने से मानव पर वर्ष भर धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी की कृपा रहती है| हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दीपावली का त्यौहार हम सब के लिए खुशियों और रोशनी का संदेश लेकर आने वाला है|

 

इस वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रविवार दिनांक 30 अक्टूबर 2016 को दीपावली का त्यौहार मनाया जाएगा। लक्ष्मी पूजन प्रदोष युक्त अमावस्या को स्थिर लग्न और स्थिर नवमांश में किया जाना सर्वश्रेष्ठ होता है। आइये जानते है दीपावली महापर्व पर पूजा के शुभ लग्न एवं मुहूर्त

 

चौघड़िया मुहूर्त -
प्रातः 08.02  मिनट दोपहर 12.10 मिनट तक चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया रहेगा ।
दोपहर 01:33 मिनट से दोपहर 02.56 तक शुभ का चौघड़िया रहेगा ।
दोपहर 02:52 मिनट से सूर्यास्त तक चर और लाभ के चौघड़िया रहेगा ।
सायं 05:42 मिनट से रात्रि 10:34 मिनट तक शुभ-अमृत और चर के चौघड़िया रहेंगे ।
मध्यरात्रि बाद रात्रि 1.48 मिनट से सूर्योदय पूर्व 3.25 मिनट तक लाभ का चौघड़िया रहेगा ।

 

प्रदोष काल - सायं 5.42 मिनट से रात्रि 8.17  मिनट तक रहेगा ।
वृषभ लग्न - सायं 6.37 से रात्रि 8.34 मिनट तक रहेगा ।
सिंह लग्न -  मध्य रात्रि 1.07 मिनट से रात्रि 3.23 मिनट तक रहेगा ।  

 

सर्वश्रेश्ठ और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पूजा का मुहूर्त-
शाम 06.50 मिनट से 07:03  मिनट तक (प्रदोष काल, स्थिर वृष लग्न और कुम्भ का स्थिर नवमांश भी रहेगा , यह लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त है )


घर पर लक्ष्मी पूजा करने का मुहूर्त-
सायं 6.37 से रात्रि 8.34 मिनट तक (वृष लग्र )

 

वृष लग्र (सायं 6.37 से रात्रि 8.34 मिनट तक) -
सामान्य, गृहस्थ, किसान, सेवाकर्मी, सोंदर्य प्रसाधन विक्रेता एवं निर्माता, वस्त्र व्यवसायी, अनाज व्यापारी, वायदा एवं शेयर बाजार वाले, व्यवसायी(दुकानदार, मार्केटिंग-फाइनेंस), होटल मालिक, अध्यापक, लेखक, एकाउंटेंट, चार्टर्ड एकाउंटेंट, बैंककर्मी, प्रशासनिक अधिकारी एवं नौकरी-पेशा लोग।

 

सिंह लग्र (मध्य रात्रि 1.07 मिनट से रात्रि 3.23 मिनट तक)-
जज, वकील एवं न्यायालय से संबंधित व्यक्ति, पुलिस विभाग, डॉक्टर, कैमिस्ट, वैद्य, दवा निर्माता, इंजीनियर, पायलेट, सेना, उद्योगपति (कारखानेदार), ठेकेदार, हार्डवेयर व्यवसायी।

 
पूजन विधि:

  • दीपावली के पर्व पर सदैव माता लक्ष्मी के साथ गणेश भगवान की पूजा की जाती है| इस का कारण यह है कि दीपावली धन, समृ्द्धि व ऎश्वर्य का पर्व है तथा लक्ष्मी जी धन की देवी है| इसके साथ ही यह भी सर्वविदित है कि बिना बुद्धि के धन व्यर्थ है| धन -दौलत की प्राप्ति के लिये देवी लक्ष्मी तथा बुद्धि की प्राप्ति के लिए श्री गणेश की पूजा की जाती है और धनपति कुबेर धन संग्रह में सहायक होते हैं| इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ही दीपावली की रात गणेश लक्ष्मी के साथ कुबेर की भी पूजा की जाती है| दीपावली के दिन शुभ मुहूर्त में घर में या दुकान में, पूजा घर मे उत्तर दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाए|

 

  • एक विशेष बात पूजन के लिए दिन के समय पूर्व की तरफ और रात के समय उत्तर दिशा की और मुख करके बैठना चाहिए। तो उत्तर दिशा की तरफ मुख गर्म कपड़े से बने आसन पर बैठ जाए और आचमन या प्राणायाम करके अपने सम्मुख एक चौकी या बजोट रख कर उस पर लाल वस्त्र बिछाकर केसर से स्वस्तिक बना दे| हल्दी पाउडर से रंगे पीले चावलों से अष्टदल बनाकर उस पर भगवन गणेश जी की सोने या चांदी की प्रतिमा या मनमोहक तस्वीर की स्थापना कर दे| भगवान गणेश जी के दाहिने तरफ माँ लक्ष्मी जी की सोने की या चांदी की मूर्ति या मनमोहक चित्र स्थापित करें दे| चित्र को पुष्पमाला पहनाएं। श्री महालक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर के पास ही किसी पवित्र पात्र में केसर युक्त चन्दन से अष्टदल कमल बनाकर उस पर द्रव्य-लक्ष्मी अर्थात रुपयों को भी स्थापित कर दे | ध्यान रखे की माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ द्रव्य लक्ष्मी की पूजा भी एक साथ करनी चाहिए। एक पात्र मे 5 हल्दी की गाठे, साबुत धनिया, कमल गट्टा, अक्षत, दूर्वा और कुछ द्रव रख कर उसके चौकी पर रख दे|

 

  • इसके पश्चात धूप, अगरबती और 5 दीप शुद्ध घी के और अन्य दीप तिल के तेल से प्रज्वलित करें। जल से भरा कलश भी चौकी पर रखें। कलश में मौली बांधकर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह अंकित करें। तत्पश्चात श्री गणेश जी को, फिर उसके बाद माँ लक्ष्मी जी को तिलक करें और पुष्प अर्पित करें। इसके पश्चात हाथ में पुष्प, अक्षत, सुपारी, सिक्का और जल लेकर भगवान गणेश जी, महा लक्ष्मी और कुबेर देव सहित सभी देवी देवताओ की पूजा का संकल्प करें। उनका आवहान करे| भगवान गणेश जी और माँ लक्ष्मी की प्रतिमा की प्रतिष्ठाकर उनका षोडशोपचार पूजन करे उसके पश्चात नवग्रह पूजन, षोडश मातृका और कलश पूजन करके प्रधान पूजा मे माँ लक्ष्मी का पूजन करे| धुप, दीप, नैवैध अर्पण करे| पान सुपारी दक्षिणा आदि अर्पण करे|

 

  • इसके पश्चात आप तिल्ली के तेल मे या शुद्ध घी मे सिंदूर मिलकर आप अपने घर के मुख्यद्वार पर और अपने व्यापार स्थल के बाहर ॐ श्री गणेशाय नम:, स्वस्तिक का चिन्ह, शुभ लाभ आदि लिखे और उनकी ॐ देहली विनायकाय नम: मन्त्र से  गंध, पुष्पादी से पूजन करे| इसी प्रकार अब आप स्याही युक्त दवांत की पूजा करे| उस पर केसर से स्वस्तिक बना दे और उसपर मोली लपेट दे| ॐ श्रीमहा काल्ये नम: से गंध, पुष्पादी से पूजन करे|

 

  • अब आप लेखनी पूजन करे अर्थात आप लिखने के पेन इत्यादि पर मोली बाँध करॐ लेखनी स्थाये देव्ये नम: मन्त्र सेगंद, पुष्पादी से पूजन करे| अब आप अपने बही खातो की पूजा करे| उसमे केसर से स्वस्तिक बनाये और ॐ श्री सरस्वत्ये नम: मन्त्र से गंध, पुष्पादीसे पूजा करे|

 

  • इसके बाद आप अपनी तिजोरी की की पूजा करे| तिजोरी मे केसर से स्वस्तिक का चिन्ह बना कर भगवान कुबेर का आव्हान करे और ॐ कुबेराय नम: मन्त्र का से गंध, पुष्पादी से पूजन करे| धुप दीप और नैवैध अर्पण करे और पूजा मे राखी हुई5 हल्दी की गाठे, साबुत धनिया, कमल गट्टा इत्यादि अपनी तिजोरी मे रख दे| इसी प्रकार गंध, पुष्पादी से तुला पूजन करे|

 

  • इसके बाद दीपमालिका पूजन करे| इसके लिए किसी पात्र में 11, 21 या उससे अधिक दीपों को प्रज्वलित कर महालक्ष्मी के समीप रखकर उस दीप-ज्योति का “ॐ  दीपावल्यै नमः” मंत्र से गन्धादि उपचारों द्वारा दीपक का पूजन करे|

 

  • दीपमालिकाओं का पूजन कर अपने आचार के अनुसार संतरा, ईख, पानीफल, धानका लावा इत्यादि पदार्थ चढाये। धानका लावा (खील) भगवान श्री गणेश को , श्री महालक्ष्मी को, कुबेर देवता को तथा अन्य सभी देवी देवताओं को भी अर्पित करे। अन्तमें अन्य सभी दीपकों को प्रज्वलित कर सम्पूर्ण गृह को दीपकों अलन्कृइत करे।

 

  • अब आप भगवान श्री गणेश , माता श्री महा लक्ष्मी और भगवान जगदीश्वर की आरती पूरे परिवार सहित करें। उसके बाद अपनी मनोकामना का ध्यान करते हुए , अपनी दरिद्रता को दूर करने की प्रार्थना करते हुए पुष्पान्जलि अर्पित करें, छमा प्रार्थना करें। और अपने धन मे वृधि , अन्न मे वृधि , वंश मे वृद्धि, सुख-ऐश्वेर्य मे वृद्धि की मंगल कामना करे|

 

  • पूजनके अन्तमें हाथमें अक्षत लेकर नूतन गणेश एवं महा लक्ष्मी की  प्रतिमा को छोडकर अन्य सभी आवाहित, प्रतिष्ठित एवं पूजित देवताओं को अक्षत छोडते हुए विसर्जित करे|

 

  • ध्यान रखे की दीपावली की रात को मंदिर, तुलसी माता, पीपल आदि के पास दीपक जलाना सभी संकटों से मुक्ति दिलाता है और महा लक्ष्मी पूजा में तिल का तेलका उपयोग ही श्रेष्ठ होता है| अभाव में सरसों का इस्तमाल कर सकते है |

 

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