बिसाऊ की अनोखी मूक रामलीला, जहां राम से लेकर रावण तक सभी पात्र मुखौटो से कहते है बात

Published Date 2016/10/05 13:53, Written by- FirstIndia Correspondent

झुझुनूं।(अशोक सोनी)  संसार मे अनुठी बिसाऊ की मूक रामलीला, जो पिछले 176 सालो से चली आ रही है। जिसे देखने बड़ी संख्या में आते है विदेशी सैलानी। रामलीला का मंचन 15 दिनो तक चलता है मूक रामलीला मंचन जो अपने आप मे आकर्षण का केन्द्र है, सभी पात्र मुखौटो का करते है प्रयोग, साम्प्रदायक शौहार्द का प्रतिक लीला मे मुस्लिम समुदाय के लोगो द्वारा ही ढोल-नगाडे बजाये जाते है जिनकी धुन पर पुरी रामलीला का मंचन होता है।

 

एक और जंहा सभी रामलीला मे अहंकार में चूर होकर रावण अपनी तेज ओर डरावनी आवाज मे दहाडता है।  रावण के साथ साथ लंका के राक्षसो की आवाज इतनी तेज होती है कि दूर-दूर तक उनकी गूंजसुनाई देती है, मगर बिसाऊ के मूक रामलीला का रावण ऐसा नहीं है। यह बोलता नही बल्की मूक बना रहता है। यह सिलसला लगातार पिछले 176 साल से भी अधिक समय से मूक रामलीला के रूप मे चला आ रहा है। 

 

देशभर में हो रही रामलीलाओं की बात करे तो झुंझुनू जिले के बिसाऊ मे हो रही मूक रामलीला का इतिहास को खंगाला जाये तो कई रोचक जानकारियां सामने आती है। बिसाऊ की मूक रामलीला देशभर मे ही नही अपितु पुरे संसार में होने वाली सभी रामलीलाओं से इसलिए अलग है, क्योंकि इसके मंचन के दौरान सभी पात्र बिन बोले (मूक बनकर) ही सब कह जाते हैं। यही नही इनके सभी पात्र अपने मुखौटो से अपनी पहचान दर्शाते है ना की बोल कर। 

 

यही कारण है कि इसको मूक रामलीला के नाम से जाना जाता है। इस तरह की रामलीला का मंचन पुरे संसार मे अन्य कही नहीं होती।यही कारण है कि यह अपने-आप मे सबसे अनुठी व अनौखी रामलीला है। मूक रामलीला की शुरुआत रामाणा जोहड़ से हुई। फिर इसका मंचन गुगोजी के टीले पर होने लगा। बाद में काफी समय तक स्टेशन रोड पर हुई। वर्ष 1949 से गढ़ के पास बाजार में मुख्य सड़क पर लीला का मंचन शुरू हुआ, जो वर्तमान में जारी है।

 

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