नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की होती है पूजा-अर्चना

Published Date 2016/10/06 10:34, Written by- FirstIndia Correspondent

शास्त्रों के अनुसार माता दुर्गा के पांचवे स्वरूप में नवरात्र की पंचमी तिथि पर मां स्कन्दमाता की आराधना का विधान है, आदिशक्ति दुर्गा के स्कन्दमाता स्वरूप की कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। इनकी उपासना से भक्त की सर्व इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है । 

 

शब्द स्कन्दमाता का संधिविच्छेद कुछ इस प्रकार है की स्कन्द का अर्थ है कुमार कार्तिकेय अर्थात माता पार्वती और भगवान शंकर के जेष्ठ पुत्र कार्तिकेय इन्हें दक्षिण भारत में भगवान मुर्गन के नाम से भी जाना जाता है तथा माता कर अर्थ अहि मां अर्थात जो भगवान स्कन्द कुमार की माता हैं वही मां स्कन्दमाता है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है की इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं अतः ये ममता की मूर्ति हैं। 

 

नवरात्र की पंचमी तिथि को देवी स्कन्दमाता के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। देवी स्कन्दमाता विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति हैं अर्थात चेतना का निर्माण करने वाली देवी हैं, इन्हें दुर्गा सप्तसती शास्त्र में “चेतान्सि” कहकर संबोधित किया गया है । नवरात्रि-पूजन के पांचवें दिन देवी स्कन्दमाता के पूजन का शास्त्रों में पुष्कल महत्व बताया गया है।  

 

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