यहां आज भी प्रज्वलित है शिव-गौरी के विवाह मंडप की अग्नि

Published Date 2016/11/06 10:35, Written by- FirstIndia Correspondent

रुद्रप्रयाग में स्थित ‘त्रियुगी नारायण’ के लिए कहा जाता है कि सतयुग में जब भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था| उस वक़्त यह ‘हिमवत’ की राजधानी था| इस जगह पर आज भी हर साल देश भर से लोग संतान प्राप्ति के लिए इकट्ठा होते हैं और हर साल सितंबर महीने में बावन द्वादशी के दिन यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है|  

 

मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए त्रियुगीनारायण मंदिर से आगे गौरी कुंड कहे जाने वाले स्थान माता पार्वती ने तपस्या की थी जिसके बाद भगवान शिव ने इसी मंदिर में मां से विवाह किया था. कहते हैं कि उस हवन कुंड में आज भी वही अग्नि जल रही है| संतान प्राप्ति के लिए इस अग्नि का आशीर्वाद लेने के लिए देश के हर हिस्से से लोग आते हैं| ऐसी मान्यता है कि भगवान केदारनाथ की यात्रा से पहले यहां दर्शन करने से ही प्रभु प्रसन्न होते है|

 

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