Here the untold story of Maharaj janak s mysterious bone

जनकनंदनी ही नहीं महाराज जनक का जन्म भी था रहस्यमयी

Published Date-25-Sep-2016 12:51:06 PM,Updated Date-25-Sep-2016, Written by- Muskan Joshi

माता सीता को तो पूरी दुनिया जानती है और उनकी पूजा करती है| उनके जन्म को लेकर कहा जाता है कि वे धरती से उत्पन्न हुईं| कुछ मान्यताओं के मुताबिक माना जाता है कि वो रावण की पुत्री थीं|आपको ये जानकर हैरत होगी कि जिस तरह से सीता का जन्म रहस्यमयी था, उसी तरह उनके पिता जनक के जन्म की कथा भी बेहद रोचक और रहस्यमयी है| बात त्रेतायुग की है| राजा जनक, निमि के पुत्र थे| उनका वास्तविक नाम 'सिरध्वज' था| राजा जनक के अनुज 'कुशध्वज' थे| त्रेतायुग में राजा जनक को आध्यात्म तथा तत्त्वज्ञान के विद्वान के रूप में भी जाना जाता था|

 


जनक के पूर्वज निमि या विदेह के वंश का कुल नाम मानते हैं| यह सूर्यवंशी और इक्ष्वाकु के पुत्र निमि से निकली एक शाखा है| विदेह वंश के द्वितीय पुरुष मिथि जनक ने मिथिला नगरी की स्थापना की थी| वंश आगे बढ़ता गया और राजा निमि का जन्म हुआ| निमि ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन करवाया, जिसमें ऋषि वशिष्ठ को पुरोहित के रूप में आमंत्रित किया था| लेकिन वशिष्ठ उस समय स्वर्ग में इंद्र के यहां यज्ञ करवा रहे थे, इसलिए वे नहीं आए|

 


तब निमि ने ऋषि गौतम और अन्य ऋषियों की सहायता से यज्ञ शुरु किया| जब वशिष्ठ को इस बात ज्ञान हुआ तो उन्होंने निमि को शाप दे दिया| निमि ने भी वशिष्ठ को शाप दिया| इसके बाद दोनों जलकर भस्म हो गए| तब कुछ ऋषियों ने दिव्य शक्ति से यज्ञ समाप्ति तक निमि के शरीर को सुरक्षित रखा| चूंकि निमि की कोई सन्तान नहीं थी, तब ऋषियों ने उनके शरीर का मंथन किया और एक पुत्र का जन्म हुआ| पुत्र का जन्म शरीर को 'मथने' से हुआ, इसलिए इस पुत्र को 'मिथि' कहा गया और मृतदेह से उत्पन्न होने के कारण जनक| विदेह वंश होने के कारण 'वैदेह' और मंथन के कारण मिथिल| इस तरह उनके नाम पर 'मिथिला' नगरी बसाई गई| कुछ वर्षों बाद 'सिरध्वज' जनक ने जब सोने की सीत से मिट्टी जोती, तो उन्हें सीता मिलीं| इस तरह राजा जनक की पुत्री सीता कहलाईं|

 


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