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दैत्य नहीं ज्ञान का भंडार थे रावण, रावण के गुणों से भगवान राम भी थे अचंभित

Published Date-11-Oct-2016 11:23:35 AM,Updated Date-11-Oct-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

हमारे पुराणों में भी यही कथा हमें सुनाई गई है कि रावण एक दैत्य थे और प्रभु राम ने उनका वध करके सच्चाई की स्थापना की थी। दशहरे के दिन भगवान राम को याद किया जाता है, उनके साहस का नमन होता है। उनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। दशहरे के दिन रावण का वध होता है और बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। लेकिन क्या कभी हमने ये सोचा है कि एक दैत्य होने के बाद भी रावण ने हमें जीवन के बारे में बहुत कुछ सीखा दिया है।

 

क्या आपको याद है कि प्रभु राम ने भी अपने भाई लक्ष्मण को रावण के पास जीवन का पाठ समझने के लिए भेजा था। उनका कहना था कि रावण से बेहतर उन्हें जीवन के संघर्षों के बारे में कोई नहीं समझा सकता है। आईए हम भी रावण की उन सीख को याद करें जो उन्होंने लक्ष्मण को दी थी। जैसे ही लक्ष्मण रावण के पास पहुंचे वैसे ही रावण ने उन्हें अपने चरणों में बैठने को कहा। एक शिक्षक की तरह उन्होंने लक्ष्मण से अपना ज्ञान बांटा।

 

रावण शिव की तपस्या करते थे। उन्होंने शिव को प्रसन्न करने के लिए कई बार अपना सिर काटा और फिर से एक नया सिर आ जाता था। वे कभी भी हार नहीं मानते थे। विश्वास के साथ वे अपनी भक्ति करते थे। एक दिन शिव प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद देने के लिए सामने आए। रावण ने अमर होने का वरदान मांगा। लेकिन शिव ने मना कर दिया। रावण ने उनसे भगवान, दैत्य, पिशाच पर जीत हासिल करने का भी वरदान मांगा।

 

राजा को बगैर टाल-मटोल किए दूसरों की भलाई करने के लिए जो भी मौका मिलता है, उसे तुरंत काम में लगाएं, उसे हाथ से निकलने देना नहीं चाहिए। एक राजा को निष्ठावान और साहसी होना चाहिए। लंका में रावण जैसा कोई राजा नहीं हो सकता है जो अपनी प्रजा के लिए कुछ भी कर सकता है। रावण ज्ञान का भंडार थे। आयुर्वेद और राजनीति पर उनकी अच्छी पकड़ थी। चार वेद और छह शास्त्रों का ज्ञान अर्जित करने वाले रावण को अपने ज्ञान पर घमंड तो जरूर था। उन्होंने कई किताबें भी लिखीं थीं। अपने दुश्मन को कभी कमजोर या छोटा नहीं समझना चाहिए। जैसा उन्होंने हनुमान के मामले में की थी।

 

जीवन के लिए सबसे जरूरी है कि आपको अच्छे बुरे का ज्ञान होना चाहिए। आपको जो करना है तुरंत करें और अच्छा करें, किसी भी अच्छे काम में देरी न करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप अपने साथ-साथ औरों का भी भला करते हैं। ईश्वर के प्रेम कीजिए या नफरत। जो भी करें पूरे दिल से करें। आप किस्मत के आगे नहीं जीत सकते हैं। जो लिखा है और आप जैसा कर्म करेंगे आपको उसका फल जरूर मिलेगा। भले ही आप बार-बार जीत रहे हैं, लेकिन खुद को विजेता मानकर लड़ना मत छोड़ें। हमेशा जो आपकी समालोचना करते हैं उनपर भरोसा करें। हमारा घमंड एक दिन टूट जाता है, इसलिए आपके पास जो है जितना है उसे सहजकर रखें और किसी भी चीज का घमंड न करें। कोई भी ऐसी चीज ज्यादा दिन तक आपके पास नहीं रहती है।

 

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