In Varanasi church where the prayer says in Bhojpuri

वाराणसी का एक ऐसा चर्च जहां होती है भोजपुरी में प्रार्थना

Published Date-26-Dec-2016 06:19:19 PM,Updated Date-26-Dec-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

वाराणसी| पूरी दुनिया में क्रिसमस की धूम है और कैरल गाकर लोग यीशु के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित कर रहे हैं। हम आपको क्रिसमस के इस मौसम में भोजपुरी चर्च के बारे में बताने जा रहे है जहां यीशु के संदेश और उनके लिए कैरल दोनों भोजपुरी में हैं। दुनिया का एकमात्र भोजपुरी चर्च बनारस मुख्यालय से तीस किलोमीटर की दूरी पर पिंडरा तहसील से पांच सौ मीटर की दूरी पर है। 1995 में स्थापित इस चर्च का मुख्य उदेश्य बाइबिल को भोजपुरी में आम लोगों तक पहुंचाना और कैरल और प्रार्थना भोजपुरी में लोगों को सुनाना और समझाना है।

 

प्रत्येक रविवार, ईस्टर और क्रिसमस में यहां विशेष आयोजन होते हैं खासकर क्रिसमस पर| क्रिसमस में यहां कैरल के साथ सोहर भी गाया जाता है जो और किसी भाषा या क्षेत्र में देखने को नहीं मिलेगा। पास्ट्रल सुधीर यहां के प्रमुख हैं जो चर्च में आने वाले लोगों को भोजपुरी में यीशु के सन्देश सुनाते हैं और प्रार्थना कराते हैं। आने वाले ज्यादातर लोग ग्रामीण पृष्ठभूमि के होते हैं जो भोजपुरी बोलते-समझते हैं। अपनी भाषा में यीशु के सन्देश और उनकी प्रार्थना लोगों को कहीं ज्यादा प्रभावित करती हैं ये यही आकर पता लगा। 

 

यहां गाए जाने वाले कैरल और सोहर में प्रभु यीशु के जन्म से सम्बन्धित तथ्यों के संकलन और प्रार्थना में उनके उपदेशों का संकलन है जिसे भोजपुरी भाषा में अनुवाद कर गीतों के माध्यम से यहां श्रद्धालु भाव-विभोर होकर गाते हैं। इसके साथ ही यीशु के उपदेशो के संकलन को भोजपुरी में अनुवादित कर किताब के रूप में श्रद्धालुओं को उपलब्ध भी कराया जाता है।

 

इस चर्च में आने वाले लोगों का कहना है कि अपनी भाषा में सन्देश/उपदेश कही बेहतर और प्रभावी तरीके से हम समझते हैं बजाय अंग्रेजी या हिंदी के साथ ही अपनत्व का भी बोध होता है। इस चर्च के माध्यम से ये बात बड़े आसानी से समझा जा सकता है कि स्थानीय भाषा बड़े से बड़े सन्देश और उपदेश को ना सिर्फ आसान बनाती है बल्कि अपनापन का एहसास भी कराती है यकीन नहीं है तो इन महिलाओं को ये सोहर गाते हुए देखिये ऐसा लगेगा की बेटलहेम जहां यीशु ने जन्म लिया था वो शायद पूर्वी उत्तरप्रदेश में ही कह है।

 

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