जानिए भगवान 'विश्वकर्मा' की पूजा का रहस्य....

Published Date 2016/09/17 15:07, Written by- FirstIndia Correspondent

भारत में विश्वकर्मा जयंती इस बार 17 सितंबर मनाई । इस दिन औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे की दुकान, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर, कम्प्यूटर सेन्टर, हार्डवेयर दुकानों में विश्वकर्मा भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है।


 
विष्णुपुराण में विश्वकर्मा को देवताओं का देव बढ़ई कहा गया है तथा शिल्पावतार के रूप में सम्मान योग्य बताया गया है। स्कंदपुराण में उन्हें देवायतनों का सृष्टा कहा गया है। विश्वकर्मा शिल्प के इतने ज्ञाता थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाऊ तैयार करने में सक्षम थे। ‘विश्वकर्माप्रकाश' विश्वकर्मा के विचारों का जीवंत ग्रंथ है। विश्वकर्माप्रकाश ग्रन्थ को वास्तुतंत्र भी कहा जाता है। इसमें मानव और देववास्तु विद्या को गणित के कई सूत्रों का वर्णन मिलता है।

 

सृष्टि की रंचना के प्रारम्भ में भगवान विष्णु क्षीर सागर में प्रकट हुए। विष्णु जी के नाभि-कमल से ब्रह्मा जी उत्पन्न हुये थे। ब्रह्मा जी के पुत्र का नाम धर्म था, जिसका विवाह वस्तु नामक स्त्री से हुआ। धर्म और वस्तु के संसर्ग से सात पुत्र उत्पन्न हुए। सातवें पुत्र का नाम वास्तु रखा गया, जो शिल्पशास्त्र की कला में पारांगत था। वास्तु के एक पुत्र हुआ, जिसका नाम विश्वकर्मा रखा गया, जिन्होंने वास्तुकला में महारथ हासिल करके एक नई मिसाल कायम की।

 

God Worship Vishwakarma Religious News

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