Know the importance why tulsi vivah is must in devuthani ekadashi

क्या है देवउठनी एकादशी, क्यों किया जाता है तुलसी विवाह

Published Date-09-Nov-2016 12:40:33 PM,Updated Date-09-Nov-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक दिवाली के बाद आने वाली एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है और कहा जाता है कि इस एकादशी पर सोए हुए देव उठ जाते हैं| इस एकादशी में भगवान विष्णु नींद से जाग जाते हैं और सभी शुभ कार्य जो अब तक रुके हुए होते हैं, वे शुरू किए जा सकते हैं। इस बार 10 और 11 नवंबर दो दिन एकादशी है। इस एकादशी पर तुलसी का विवाह होता है। ऐसा माना जाता है कि ये अच्छा योग होता है, विवाहों में जो भी अर्चनें होती हैं, वो दूर हो जाती हैं और विवाह के लिए अच्छा योग बन जाता है।  

 

तुलसी का पौधा वैसे भी आपके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और पूजन में तुलसी का इस्तेमाल काफी शुभ होता है। इस दिन यह संदेश भी दिया जाता है कि औषधीय पौधे तुलसी की तरह सभी के जीवन में हरियाली और ताजगी लौटे। इस एकादशी पर तुलसी विवाह का सबसे ज्यादा महत्व होता है। दरअसल, इस एकादशी पर कहा जाता है कि देव अपने दरवाजे खोल देते हैं। देवउठनी एकादश को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है।

 

इस एकादशी से कई तरह की धार्मिक परंपराएं जुड़ी हैं। ऐसी ही एक परंपरा है तुलसी-शालिग्राम विवाह की। शालिग्राम को भगवान विष्णु का ही एक स्वरुप माना जाता है। तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति या शालिग्राम पाषाण का पूर्ण वैदिक रूप से विवाह कराया जाता है। पुराणों में तुलसी जी को विष्णु प्रिया या हरि प्रिया कहा जाता है। विष्णु जी की पूजा में तुलसी की भूमिका होती है।

 

जो व्यक्ति तुलसी के साथ शालिग्राम का विवाह करवाता है उनके दांपत्य जीवन में आपसी सद्भाव बना रहता है और मृत्यु के बाद उत्तम लोक में स्थान मिलता है। इस दिन शालिग्राम और तुलसी जी का विवाह कराकर पुण्यात्मा लोग कन्या दान का फल प्राप्त करते है। जो इनका विवाह कराते हैं वो व्रत रखते हैं। शाम को तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और फिर शालिग्राम के साथ तुलसी के पौधे को परिणय बंधन में बांधा जाता है।

 

शालिग्राम मूर्ति यानि विष्णु जी की काले पत्थर की मूर्ति की पूजा की जाती है। अगर आपका काला पत्थर न मिले तो आप विष्णु जी की तस्वीर भी रख सकते हैं। शाम के समय सारा परिवार इसी तरह तैयार हो जैसे विवाह समारोह के लिए होते हैं। तुलसी का पौधा एक चोकी पर आंगन, छत या पूजा घर में बिलकुल बीच में रखें। एक विवाह में जिन चीजों का इस्तेमाल होता है, वो सारी चीजें, महंदी,मोली, रोली,धागा, फूल, चंदन, चावल, मिठाई, शगुन की हर चीज पूजन सामग्री के रूप में रखी जाती है।

 

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