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Lord Ganesha has given geeta gyan to king varenya

गणेश जी ने भी दिया था गीता का ज्ञान, 11 अध्याय में 414 श्लोक है गणेशगीता में

Published Date-18-Dec-2016 12:50:01 PM,Updated Date-18-Dec-2016, Written by- Goverdhan Chaudhary

महाभारत में जहां श्रीकृष्ण अर्जुन को उनका कर्तव्य याद दिलाया था, वहीं गणेश गीता में गणपति ने यह उपदेश युद्ध के बाद राजा वरेण्य को दिया था| 'गणेशगीता' के 11 अध्यायों में 414 श्लोक हैं| गणेशगीता के पहले अध्याय 'सांख्यसारार्थ' में गणपति ने राजा वरेण्य को योग का उपदेश दिया और शांति का मार्ग बतलाया| इसके दूसरे अध्याय में गणेश जी ने राजा को कर्म के मर्म का उपदेश दिया| इस अध्याय का नाम है 'कर्मयोग'| तीसरे अध्याय में गणेश जी ने राजा वरेण्य को अपने अवतार धारण करने का रहस्य बताया|

 

गणेशगीता में योगाभ्यास तथा प्राणायाम से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण बातें बतलाई गई हैं| छठे अध्याय 'बुद्धियोग' में भगवान गणपति राजा वरेण्य को समझाते हैं कि अपने सत्कर्म के प्रभाव से ही मनुष्य में ईश्वर को जानने की इच्छा जागृत होती है| जिसका जैसा भाव होता है, उसके अनुरूप ही मैं उसकी इच्छा पूर्ण करता हूं| अंतकाल में भगवान को पाने की इच्छा करने वाला भगवान में ही लीन हो जाता है| मेरे तत्व को समझने वाले भक्तों का योग-क्षेम मैं स्वयं वहन करता हूं|

 

गणेशगीता में भक्तियोग का वर्णन भी है| इसमें भगवान गणेश ने राजा वरेण्य को अपने विराट रूप का दर्शन कराया| नौवें अध्याय में क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का ज्ञान तथा सत्व, रज, तम तीनों गुणों का परिचय दिया गया है| दसवें अध्याय में दैवी, आसुरी और राक्षसी तीनों प्रकार की प्रकृतियों के लक्षण बतलाए गए हैं| इस अध्याय में गजानन कहते हैं कि काम, क्रोध, लोभ और दंभ ये चार नरकों के महाद्वार हैं, अत: इन्हें त्याग देना चाहिए तथा दैवी प्रकृति को अपनाकर मोक्ष पाने का यत्न करना चाहिए|

 

अंतिम ग्यारहवें अध्याय में कायिक, वाचिक तथा मानसिक भेद से तप के तीन प्रकार बताए गए हैं| गणेशगीता का ज्ञान पाने के बाद राजा वरेण्य राजगद्दी त्यागकर वन में चले गए. वहां उन्होंने गणेशगीता में कथित योग का आश्रय लेकर मोक्ष पा लिया| गणेशगीता में लिखा है कि जिस प्रकार जल, जल में मिलने पर जल ही हो जाता है, उसी तरह श्रीगणेश का चिंतन करते हुए राजा वरेण्य भी ब्रह्मालीन हो गए|

 

Lord Ganesha, Geeta Gyan, Ganeshgeeta, King Varenya, 11 chapters, 414 verses

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