Raymata's temple in jhunjhunu

हिन्दु-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है गांगियासर रायमाता का मंदिर

Published Date-03-Oct-2016 03:13:56 PM,Updated Date-03-Oct-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

झुंझुनूं| गांगियासर का रायमाता का मन्दिर है हिन्दु मुस्लिम भाई चारे व शौहार्द का प्रतिक, नवरात्रा के समय यहा हिन्दु के साथ साथ मुस्लिम समाज के लोग भी आते है दर्शन करने, यहा अष्ठमी के समय लगने वाले मेले मे मुस्लिम लोगो के द्वारा कुस्ती करवाई जाती है, कुस्ती मे भाग लेने के लिये राजस्थान के साथ हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, से भी पहलवान आते है, रायमाता के यहा मान्यता है की जो भी मन से मन्नत मांगता है वह पूरी होती है|

 

वैसे तो जिले में कई शक्तिपीठ स्थापित है, परंतु गांगियासर की रायमाता की शक्तिपीठ अपनी वैभवशाली परंपरा को कायम रखे हुए है। यहा की मान्यता है सचे मन से जो भी मनोकामना मांगी जाती है वह मुराद जरूर पुरी होती है। यह स्थलहिन्दु ही नही मुस्लिम समाज के लोगो मे भी खास मान्यता रखता है। यहा नवरात्रा मे मेले का भी आयोजन रखा जाता है जिसमे पुरे गांव मे मुस्लिम परिवार भी दर्शन करने जाते है। हिन्दु ही नही मुस्लिम लोग भी छुट्टी रखते है। दर्शन ओर पुजाअर्चना के साथ साथ यहा कुस्ती प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाता है जिसमे राजस्थान हरियाण, दिल्ली, उत्तर प्रदेश पंजाब तक के पहलवान आते है। अप्रवासी एवं स्थानीय भक्तो का यह मनपंसद उपासना स्थल है।
वी- मन्दिर के बारे मे मान्यता है कि करीब 9 हजार की आबादी वाले गांगियासर ग्राम की देवी रायमाता के प्रागट्य  का इतिहास भी काफी चमत्कारी एवं रोचक है। मान्यता है कि करीब 275 वर्ष पूर्व ग्राम के दक्षिणी शग पर स्थित एक ऊंचे टीले पर साधुसेवापुरी जी तपस्यारत थे कि अचानक एक दिन जोरों का भूकंप आया और पृथ्वी जोर से हिलने लगी। यह देखकर वहां चरगाहे ग्रामीण आश्चर्यचकित हो गए। ग्रामीणों ने देखा कि पृथ्वी  एक निष्चित स्थान पर हिल-डोल रही थी और देखते ही देखतेजमीन में दस उंगल जितनी बड़ी श्री दुर्गा माता की मूर्ति प्रकट हुई। तभी से यहा इस माता की मुर्ती को हिन्दू मुस्लिम दोनो समाज के लोग श्रधा के साथ पुजते है।

 

यहा नवरात्रा के समय खास पूजा का आयोजन किया जाता है। इस समय यहा काफी भक्तजन आते है जिनमे अप्रवासी राजस्थान के भी होते है। इस दौरान यहा मेले का भी आयोजन होता है जो अष्ठमी व नवमी को होता है जिसमे हिन्दू मुस्लिमदोनो ही समाज के लोग बढचढ कर भाग लेते है। इससे पहले यहा सैकडो महिलाओ के द्वारा कलश यात्रा निकालकर मेले का शुभारम्भ किया जाता है। इस मन्दिर को बनाने मे सेठ साहुकारो के साथ मुस्लिम लोगो ने भी काफी योगदान दिया है। वहीअष्ठमी व नवमी के दिन मुस्लिम लोग भी छुट्टी रखते है ओर मन्दिर मे अपने परिवार के साथ दर्शन के लिये आते है। यही नही नवमी को यहा आस-पास के राज्यो के पहलवानो को कुस्ती के आयोजन मे भी देखा जा सकता है जो हरियाण, पंजाब,दिल्ली से यहा कुस्ती के लिये आते है जिसका निर्णायक मुस्लिम होता है।

 

यहा की मान्यता है कि यहा एक खाती समाज का व्यक्ति था जो जमीन से निकली माताजी की मूर्ति के पास  गया, उसी समय aakashvanni हुई कि मै रायमाता हुं और तुम मेरी पूजा करो यह खबर ग्राम सहित आस-पास के ग्रामों के लोगों को लगीतो दूरदराज से देवी की मूर्ति को देखने व उनके दशर्न करने के लिए दशनार्थी आने लगे। ग्राम के तत्कालीन शाशक देवदत जी को देवी प्रकट होने की सूचना मिली तो उन्होने बाबा सेवापुरी व सभी धर्मावलंबियों के साथ देवी की पूजा-अर्चना कर जहां मूर्तिप्रकट हुई वहां पर देवी का मंदिर बनवा दिया। बाद में इसी मंदिर को श्रध्य रूप देने में ग्राम के सेठ साहुकार परिवार का भी योगदान रहा। गांगियासर की ष्रायमाताष् कलयुग की चमत्कारिक देवी के रूप में प्रसिद्ध हुई है। भक्तजन माता का नाम श्रद्धापूर्वकजपते हैं।

 

बताया जाता है कि यहा मुगलों के शासन में मीर खां नाम का पठान गांव में बड़ी लूटमार मचाया करता था, जो बाद में टोंक का नबाब बना। एक दिन मीर खां लूटने के इरादे से गांव में आया और अपनी फौज से गांव को घेर लिया। ग्रामीण भयभीत होकर सेवापुरी महाराज की शरण में पहुंचे और इस संकट से बचाने की प्राथना की। महाराज ने फौज का मुकाबला करने की बात कही और आश्चर्य किया कि यदि तुम लड़ोगे तो जीत तुम्हारी ही होगी। जब युद्ध शुरू हुआ तो लुटेरों की फौज ने तीन गोले तोपसे बरसाए परंतु अचानक तोंपे रूक गई उनके मुंह नहीं खुले। ग्रामीणों से मुकाबला कर रही फौज की स्थिति खराब हो गई। मीर खां ने जब देखा कि उसके सिपाही एक एक करके मर रहे हैं ओेर एक स्त्री हाथ में तलवार और खप्पर लिए फौज को मार रहीहै। एक साधु हाथ में चिमटा व पत्थर लिए फौज के बीच में घूम रहा है। यह दृष्य देखकर मीर खां के पांव उखड़ गये। वह गांव से भाग लिया| रायमाता प्रबंध समिति के अध्यक्ष बनवारी लाल मीणा ने बताया कि सैंकड़ों वर्षों की पुनीत परम्परा के अनुसार श्री रायमाता गांगियासर के सुप्रसिद्ध मेला का आयोजन हर वर्ष की भाती  08-10-2016 से 10-10-2016  को होगा साथ ही  मंदिर प्रागंण मेंरात्रि में विशाल जागरण का भी आयोजन किया जायेगा।

 

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