नवरात्र के दूसरे दिन होती है देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा..

Published Date 2016/10/02 12:50, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली| नवरात्र के दूसरे दिन देवी के ब्रम्ह्चारिणी रूप की पूजा की जाती है। ब्रम्ह का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाला यानि ब्रम्ह्चारिणी का अर्थ हुआ ताप का आचरण करने वाला। मां ब्रम्हचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योतोर्मय और भव्य है। मां दुर्गा के दिव्य दर्शन और आरोग्यता के कारण लोग मां के इस रूप की पूजा अर्चना करते हैं। काशी के दुर्गाघात क्षेत्र में देवी बह्मचारिणी का विशाल मंदिर स्थित है|

 

ब्रम्ह्चारिणी मां के इस रूप में उनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है| भक्त अपने मन को इस दिन मां के चरणों में लगाते है और इनकी अराधना से भक्तों में ताप करने की शक्ती बढ़ती है। इनकी अराधना से मनुष्य को विजय प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं मां ब्रम्ह्चारिणी यह सन्देश देती हैं कि बिना परिश्रम के सफलता प्राप्त करना असंभव है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की बुद्धि होती है और जीवन में आने वाली किसी भी समस्या का आसानी से सामना कर सकें|

 

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