रूप चौदस पर ये उपाय बनाएंगे आपको को खूबसूरत, देवताओं के समय से चली आ रही है मान्यता

Published Date 2016/10/29 10:35,Updated 2016/10/29 10:35, Written by- FirstIndia Correspondent

दिवाली से एक दिन पहले देशभर में छोटी दिवाली मनाई जाती है, इसे रूप चौदस या नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है जो कार्तिक महीने की चतुर्दशी के दिन आता है। बंगाल और बिहार में यह दिन मां काली के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह धनतेरस के ठीक अगले दिन आता है। इस दिन लक्ष्मी की कृपा बरसती है, बस करने होंगे कुछ उपाय।

 

  • छोटी दिवाली के दिन सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए और नित्य-कर्म से निवृत्त होकर तिल के तेल से शरीर का मालिश करने के बाद ही स्नान करना चाहिए।
  • स्नान करने के बाद श्री कृष्ण, धन्वंतरि और यम देवता के सामने दीपक जलाकर प्रार्थना करनी चाहिए।
  • नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान मंदिर जाना भी लाभदायी माना जाता है। उन्हें प्रसाद के रूप में गुड़ और चने का भोग चढ़ाएं।
  • छोटी दिवाली पर शाम के समय अपने पूरे घर में दिवाली की तरह ही दीपक जलाएं। इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर के मंत्रों का जाप करना लाभदायी होगा।

 


पौराणिक कथा:
इस दिन के व्रत और पूजा के संदर्भ में एक कथा यह है कि रंति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके समक्ष यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नरक जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है।


 
यह सुनकर यमदूत ने कहा कि- हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था, यह उसी पाप कर्म का फल है। इसके बाद राजा ने यमदूत से एक वर्ष समय मांगा। तब यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचे और उन्हें अपनी सारी कहानी सुनाकर उनसे इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा।


 
तब ऋषि ने उन्हें बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है।  =

 

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