इस मंदिर में हर साल आते है करोड़ों निमंत्रण पत्र, मनीआर्डर और चिटिठ्यां

Published Date 2016/10/03 13:24, Written by- FirstIndia Correspondent

सवाईमाधोपुर। सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय से महज 14 किलोमिटर की दुरी पर अरावली र्पवत मालाओं से घिरा रणथम्भौर दुर्ग स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर दुनियांभर में एक मात्र ऐसा मंदिर है। जहा हर साल करोड़ो की संख्या में भगवान गणेश को निमन्त्रण पत्र एंव चिटिठ्यां भेजी जाती है। जिन्हे मंदिर के पुजारी इन चिटिठ्यों एंव निमन्त्रण पत्रों को भगवान त्रिनेत्र गणेश को पढ़ कर सुनाते है और भगवान के चरणों में रख देते है।

 

माना जाता है की भगवान त्रिनेत्र गणेश को निमंत्रण भेजने से हर कार्य निर्विघ्न पुर्ण हो जाता है। रणथम्भौर दुर्ग स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर आस पास के लोगों सहित पुरे देश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिये आस्था का केन्द्र है। साल भर यहाॅ श्रद्धालुओं का सैलाब रहता है। यहा आने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन कर अपनी और अपने परिवार की कुषल-क्षेम की कामना करते है। हर साल यहा हिन्दी महीनों की भादवा मास की गणेश चतुर्थी के अवसर पर मेला लगता है। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ ही देश के विभिन्न क्षैत्रों से लाखों की तादात में श्रद्धालु यहा पहुॅचते है। जिसके चलते स्थानीय प्रशासन  व राज्य सरकार के द्वारा विशेष ट्रेन व बसों का संचालन किया जाता है। त्रिनेत्र गणेश के इतिहास को लेकर लोगों में अलग अलग धारणाऐें बनी हुई है।

 

 

कहा जाता है की पुरे विश्व में रणथम्भौर दुर्ग में स्थित त्रिनेत्र भगवान गणेश की प्रतिमा एक मात्र ऐसी प्रतिमा है जिस पर भगवान गणेश के तीन नेत्र है। यह प्रतिमा अनायास ही लोगों को अपनी और खिंच लेती है। इसी के चलते यह स्थान लोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। यहा के लोगों का ऐसा भी मानना है की किसी भी कार्य को करने से पुर्व भगवान गणेश को निमंत्रण देना आवश्यक है। जिससे कार्य अपने आप सफल होता चला जाता है। और यही कारण है की हिन्दु रिती-रिवाजों और पोराणिक कथाओं व आस्था के कारण देश के कौने-कौने से लोग कोई भी मांगलिक कार्य करनें से पहले भगवान त्रिनेत्र गणेश को न्योता देना नही भुलते है। रणथम्भौर दुर्ग स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर दुनिया का ऐसा पहला मंदिर है। जहा हर साल करोडों की तादात में चिटिठयां और निमंत्रण पत्र आते है। और तो और भगवान गणेष के श्रद्धालु मनिआॅडर भी भेजते है। देश के कोने-कोने से यहा निमन्त्रण पत्र आते है। देश ही नहीं बल्की विदेशों से भी यहा बडी संख्या में निमंत्रण पत्र आते है। निमंत्रण पत्र भेजनें वाले के लिये पुजारी सुख और श्रमृद्धी की कामना करते है। कहा जाता है की भगवान त्रिनेत्र गणेश सुख और समृद्धी के दाता है। इस लिये कोई भी कार्य करनें से पहले लोग भगवान गणेश को न्योता भेजते है इस लिये यहा हर साल बडी संख्या में निमंत्रण पत्र आते है।

 


लोगों का मानना है की भगवान गणेश की इस प्रतिमा कि उत्पति अपने आप हुई थी। जमीन में से अपने आप इस प्रतिमा के निकलने से भी लोगों में इसके प्रति अथाह आस्था है। तो कई लोगों का मानना है की भगवान शिव ने जब बाल्य-अवस्था में गणेश जी का शीश काटा था तो वो शीश यहा आकर गिरा था। तब से ही यहा भगवान गणेश के शीश की पुजा की जाती है। साथ ही कुछ लोगों को कहना है की यह मंदिर पांडवों के समय से भी पहले का है। 

 

लोगों का कहना है की जब भगवान कृष्ण का विवाह हुआ था उस समय भगवान गणेश अपना विवाह नही होने को लेकर नाराज हो गये थे। और अपनी मुसा सैना के द्वारा भगवान कृष्ण की बारात के रास्ते में बाधा  उत्पन्न कर दी थी। तो कृष्ण भगवान ने रणथम्भौर की ही रिद्धी सिद्धी के साथ भगवान गणेश का विवाह सम्पन्न करवाया था और यही कारण है इस मंदिर में भगवान गणेश रिद्धी-सिद्धी के साथ विराजमान है। 

 

 

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