After the demonetization mismanagement being seen at banks

नोटबंदी के बाद बैंकों पर दिख रहा बदइंतजामियों का आलम

Published Date-15-Nov-2016 03:13:22 PM,Updated Date-15-Nov-2016, Written by- Ravish Tailor

टोंक। केन्द्र सरकार द्वारा नोटबंदी के फैसले को करीब एक सप्ताह हो गया, लेकिन अभी तक भी बैंकों और डाकघरों के बाहर तक लगने वाली बड़ी-बड़ी कतारों को सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जबकि तमाम परेशानियों के बावजूद लोग सरकार के फैसले से खुश तो है, लेकिन बैकों के बाहर बंदइंतजामियों के चलते परेशान हो रहे लोग आज खासे नाराज दिखाई दिए। सोमवार को गुरूनानक जयंती की छुट्टी के बाद आज मंगलवार को टोंक मे अधिकतर बैंक समय पर नहीं खुल पाये, जिससे अलसुबह ही लाईन मे खड़े लोगों को 12 बजे तक पैसे नहीं निकाल पाये।


टोंक जिले मे मंगलवार को अधिकांश बैंक समय पर नहीं खुले, जबकि कई बैंक खुलने के बावजूद पुलिस का इंतजार करते दिखाई दिये और पुलिस आने के बाद ही कामकाज शुरू किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी बुरे हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि बैंकवाले मनमानी कर रहे हैं और एक तो हजार और पांच के नोट बदले नहीं जा रहे, जबकि पैसे निकलवाने पर छोटे नोटों की बजाय 2-2 हजार के नोट दे रहे हैं, जो उनके लिये समस्या बन रहे हैं। ऐसे में 2 हजार के छुट्टे करवाना बाजार मे नामुमकिन हो रहा है और दो हजार का नोट किसानों के लिये सिरदर्द बना हुआ है।


वहीं दूसरी ओर बैंकों के बाहर लम्बी-लम्बी कतारों के कारण लोगों के रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में रोज कमाकर रोज खाने के वालों के लिए खासी समस्या खड़ी हो गई कि वह कमाने जाये या फिर बैंको मे नोट बदलवाने। कई लोगों को पैसे निकलवाने के लिये सुबह जल्दी ही लाइन में लगने के बावजूद पैसे नहीं मिल रहे हैं, जबकि कई लोग तीन-तीन, चार-चार दिन से लाईन मे लगने के बावजूद अपनी बारी आने से पूर्व ही बैंक मे कैश खत्म होने की शिकायत कर रहे हैं।


ऐसे ही हालात एटीएम के बाहर लाईन लगे लोगों के हैं, जिनका आरोप है कि काफी समय खड़े रहने के बावजूद वे पैसे नहीं निकाल पा रहे है। 12 बजने के बावजूद एटीएम नहीं खुले हैं, कुछ खुल रहे हैं, तो वहां लम्बी लाईनों मे घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। लोगों को आरोप है कि सरकार का फैसला सुनने में तो अच्छा है, लेकिन अपने पैसों के लिए जो इंतजार करना पड़ रहा है, उससे आमजन को काफी दिक्कत हो रही है।


सरकार के फैसले के बाद समय पर अपना पैसा नहीं मिल पाने से आम आदमी बैंकों पर लापरवाही और बदइंतजामी का आरोप लगा रहा है। जबकि केन्द्र सरकार का कहना है कि कैश की कोई कमी नहीं है, लेकिन सच्चाई यह है बैंको को जरूरत के हिसाब से कैश नहीं मिल पा रहा है और मांग के हिसाब से पैसे नहीं मिलने से बैंककर्मी आमजन को पैसे नहीं दे रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों मे भी बैंकर्स की यही समस्या सामने आ रही है। उनका कहना है कि उनके पास दो हजार का ही नोट आया है।

 

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