Nomad families requested to collector to provide basic facilities

कलेक्टर से मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग कर रहे है घुमंतू परिवार

Published Date-15-Dec-2016 06:11:24 PM,Updated Date-15-Dec-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

टोंक | गाड़ियां लुहार और घुमंतू जातियों के लिए भले ही सरकार बड़े-बड़े दावें करती हो लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत यह है कि आज भी ऐसे हजारों परिवार आसमान की छत के नीचे सर्दी-गर्मी और बरसात में जीने को मजबूर है| यही कारण है कि कई बार मूलभुत सुविधाओं की मांग कर चुके इन लोगों की हालात में अब तक सुधार नहीं हो पाया है| गुरुवार को घुमंतू जाति से जुड़े परिवार कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मूलभुत सुविधाओं की मांग के लिए प्रदर्शन कर अपना दर्द जाहिर किया।

 

टोंक जिला कलेक्ट्रेट परिसर मे प्रदर्शन कर मुलभुत सुविधाओं की मांग कर रहे यह लोग मुलभुत सुविधाएं पाने के लिए अपने वर्ग समुदाय की सर्वे की मांग कर रहे है| दरसअल यह मदारी, कलन्दर, गाडिया लुहार, सिंगीवाल, नट, कालबेलियां, भोपा, भांड और मिरासी समुदाय से जुड़े घुमंतू और अर्द्ध घुमंतू परिवारों ने गुरुवार को जिला कलेक्टर से मिलकर यह अवगत कराया कि सरकार ने पहले तो उनका रोजगार छीनकर उन्हें बेरोजगार कर दिया और अब पिछले दो दशकों से हजारों घुमंतु और अर्द्ध घुमंतु परिवार गुर्बत की जिन्दगी जीने को मजबूर है|

 

कलेक्टर से मांग के दौरान उन्होंने कहा कि उनके परिवारों का सर्वे करवाकर उन्हें मुलभुत सुविधाएं देने के साथ ही सरकारी योजनाओं से जोडा जाए ताकि आम भारतीयों की तरह उनका व उनके परिवार भी वर्तमान धारा से जुड़ पाए| क्योंकि पहले जहां रीछ, बंदर और करतब दिखाकर रोजी-रोटी कमाने वाले परिवारो के हालात रीछ, बंदर और उनके संसाधन छीनने के दो दशक बाद भी बदतर है| यहां तक की घुमंतू परिवार के लोगो को मरने के बाद जमीन तक नसीब नही होती है और मजबूरन उन्हे अपने घरो मे दफनाना पडता है|

 

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