two and a half years of the life of innocent Notbandi

नोटबंदी के कारण गई ढाई साल के मासूम की जान

Published Date-21-Nov-2016 11:37:20 AM,Updated Date-21-Nov-2016, Written by- FirstIndia Correspondent

टोंक। भारत सरकार के पांच सौ और हजार के नोट बंद किये जाने के फैसले पर भले खूब राजनीति हो रही है और पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी दलीलों से लोगो का मन मोहने की कौशिश कर रहे है। लेकिन यह हकीकत किसी से छुपी नही है कि आमजन और गरीब तबका सरकार के इस फैसले से पूरी तरह से प्रभावित हुआ है।

 

टोंक नगर परिषद मे वार्ड 24 के कालीपल्टन क्षेत्र के ओसामा खां का घेर के रहने वाले अकबर अली के परिवार को भी नोटबंदी ऐसा दर्द दे गया, जिससें उबरने मे शायद उन्हे काफी समय लगेगा। दरअसल 11 नवम्बर को अपने ढाई साल के रेहान को उल्टी-दस्त होने पर उसकी मां रईसा और पिता अनवर उसे सआदत हॉस्पीटल लेकर आए।

 

लेकिन इलाज मे ढिलाई बरतने पर पिता को गुस्सा दिखाना भारी पड गया। सआदत हॉस्पीटल के चिकित्सकों ने झुंझलाहट मे बच्चें को डबल निमोनिया का मरीज बताकर जयपुर जाकर इलाज कराने का फरमान सुना दिया। परिवार वाले  रैफर टिकट लेकर जैसे-तेसे जयपुर पहुंचे।

 

परिवार पर नोटबंदी का कहर टूट पडा और टोंक से हजार-पांच के नोट उनके लिये कागज के टूकडे साबित हुए। परिवार वाले निजी मेडिकल से मासूम की दवाईयां ले पाए। चार-पांच दिन जयपुर अस्पताल मे परेशान होने के बाद परिस्थितियों से तंग आकर मासूम का उपचार खत्म होने से पूर्व ही परिवार बच्चें को लेकर अपने घर टोंक लौट आया। लेकिन शनिवार को अचानक बच्चें की तबीयत बिगड और अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसके मृत घोषित कर दिया।

 

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