कहीं बन गई पक्की सड़क तो कहीं मूलभूत सुविधाएं भी नहीं

Published Date 2017/04/11 17:09, Written by- FirstIndia Correspondent

कोटड़ा । फुलवारी की नाल वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र के अंदर बसे गांवों में अलग-अलग नियमों का खेल चल रहा है। एक तरफ गांवों सडके बन गई है बिजली के खंबो पर बिजली भी गांवों तक पहुंच गई है। दूसरी और लोगों की मांग पर कोई तव्जजो ही नही मिल पाई है। ऐसे मे ग्रामीणों ने वन विभाग पर दो तरह के रवेया अपनाएं जाने का आरोप लगाते हुए उनके विकास कार्य पर वन विभाग को बांधा बताया है। मामला बेडाधर पंचायत में सडक निर्माण व बिजली की सुविधा पहुंचाने का है।

 


बेडाधर के ग्रामीण पूर्व सरपंच सवली बाई, पूर्व सरपंच बाबूलाल खोखरिया , क्षेत्र के जिम्मेदार सोहनलाल परमार, लिम्बाराम अंगारी, रमेश गमार आदि ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए बनने वाली सडक को वन क्षेत्र बताकर सडक बनने नही दि जा रही है। साथ ही बिजली को भी इसी कारण से वहां तक पहुंचने नही दिया जा रहा है। जबकि वन क्षेत्र के आने के बावजूद आशावाडा गांव में डामरीकृत सडक का निर्माण सात साल पूर्व ही करवाया गया है। इसके अलावा आशावाडा गांव तक बिजली भी वहां पहुंचा दी है।

 


आशावाडा ग्राम में सात साल पूर्व ही हो चुका सडक का निर्माण
फुलवारी की नाल वन्य क्षेत्र में बसे आशावाडा गांव को वर्ष 2007 में ही डामरिकृत किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत दौतड से आशावाडा तक तीन किमी सडक का निर्माण करवाया गया है। इसके अलावा उक्त गांव में बिजली भी पहुंचा दी गई है। जिससे दो वर्ष बीत चुके है।

 


बेडाधर आजादी के बाद से सड़क सहित अन्य भूलभूत सुविधाओं से महरूम
बेडाधर पंचायत से जूडे गांवों में अब सडक बिजली जैसी सुविधा ही नही मिल पाई है। इसी को चलते यहां के लोग कई बार आंदोलन , घेराव , धरना प्रर्दशन भी कर चुके है बावजूद इसके इनको कोई लाभ नही मिल पाया है।

 


बिजली की मांग को लेकर आंदोलन जारी है
बेडाधर पंचायत के ढिया गांव के करीब 200 परिवारों को सौर उर्जा से रोशन करने के लिए स्वीकृत कि गई है। परंतु यहां के लोग बिजली की मांग को लेकर उक्त सुविधा को लेने से इंकार कर रहे है। उनका कहना हैकि वर्षों के बाद भी उन्हे बिजली सड़क अन्य सुविधाएं नही मिल पाई है। इसी तरह ये सोलर लाइट भी एक छलावा है। इसके अलावा अन्य वन क्षेत्र में होने वाले कार्यों को भी लोगों ने अपनी मांग को लेकर रोकवाया हुआ है।

 


सड़क निर्माण का काम पीडल्यूडी का है। अगर वे वन क्षेत्र में आने वाली सडकों के लिए प्रपोजल बनाकर प्रमिशन के लिए भेजते हैं तो हम नियामानुसार कोपरेट करेंगें।आशावाडा पुरी तरह वन क्षेत्र में नही आता है हो सकता है इस वजह से वहां सडक निर्माण हो गया है।

 

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